‘हम भी मैदान में हैं’ के नारे के साथ देश के सुरक्षाबलों ने गजब की फुर्ती दिखाते हुए लॉकडाउन 1.0 के दौरान पीपीई के तहत करीब 15 लाख प्रोटेक्शन सूट और मास्क बनाने का कीर्तिमान सा बना दिया है।
कोरोना के चलते लागू हुए पहले लॉकडाउन में पीपीई को लेकर देश में खासा बवाल मचा रहा। डॉक्टर, नर्स और दूसरे मेडिकल स्टाफ को ये मास्क और सूट, नहीं मिल पा रहे थे। देश के कई हिस्सों से ऐसी शिकायतें आईं कि कोरोना की लड़ाई में अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों का इलाज करने वाला मेडिकल स्टाफ पीपीई के लिए जूझ रहा है।
देश के सबसे बड़े अर्धसैनिक बल सीआरपीएफ के डीआईजी एम. दिनाकरण बताते हैं कि जैसे ही हमारा डिजाइन पास हुआ, हमने अपनी अधिकांश यूनिटों में काम शुरू करवा दिया। देखते देखते लाखों की संख्या में पीपीई तैयार कर दिए गए।
आईटीबीपी ने भी हाई क्वॉलिटी वाले पीपीई का निर्माण शुरू कर दिया। बीएसएफ की यूनिटों में भी मास्क और सूट बनने लगे। आईटीबीपी प्रवक्ता विवेक पांडे के अनुसार, हमारे जवान अपने फेब्रिकेशन सेंटर में पर्सनल प्रोटेक्शन इक्विपमेंट और मॉस्क बना रहे हैं।
इन उपकरणों को तैयार करने से पहले एनआईटीआरए और एम्स के तकनीकी विशेषज्ञों के सामने इनका ट्रायल किया जाता है। डीआरडीओ ने लॉकडाउन के दौरान करीब 20 हजार लीटर सैनिटाइजर तैयार किया था।
दिल्ली पुलिस को दस हजार लीटर सैनिटाइजर दिया गया। इसके अलावा विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों को भारी संख्या में मास्क भी मुहैया कराए गए। डीआरडीओ की तर्ज पर विभिन्न केंद्रीय अर्धसैनिक बलों और राज्य पुलिस ने भी अपने स्तर पर पीपीई का निर्माण करना शुरू कर दिया।
सेना के तीनों अंग भी अपने स्टाफ एवं आम लोगों के लिए भारी संख्या में पीपीई उपकरण बना रहे हैं। बॉर्डर के आसपास रह रहे लोगों को अर्धसैनिक बलों ने अपनी यूनिटों में बने पीपीई वितरित किए हैं।