संसद की लोक लेखा समिति ने मुंबई के परेल में यात्री टर्मिनल बनाने के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट को मंजूरी देने में देरी के लिए रेल मंत्रालय से सवाल किया है। समिति ने यह भी कहा कि मंत्रालय मध्य रेलवे के परेल वर्कशॉप में कोच नवीनीकरण इकाई स्थापित करने में अपने मानदंडों का पालन करने में विफल रहा, जिस पर 22.07 करोड़ रुपये का अवांछित व्यय हुआ, जिसके बाद उसने यात्री टर्मिनल बनाने का फैसला किया।
लोक लेखा समिति ने रिपोर्ट में क्या कहा?
संसद में 21 मार्च को पेश की गई एक रिपोर्ट में लोक लेखा समिति ने कहा कि रेल मंत्रालय के मानदंडों (अगस्त 1980 और फरवरी 1985 में जारी) में कहा गया है कि निविदाएं आमंत्रित करने से पहले सभी क्षेत्रीय रेलवे को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे ठेकेदार को कार्य स्थल और आपूर्ति योजना सौंपने की स्थिति में हैं।
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2007 में बनी योजना, अब तक अधूरी
2007-08 में मध्य रेलवे ने परेल वर्कशॉप में हर महीने 25 ब्रॉड गेज कोच मरम्मत करने की योजना बनाई। इसकी लागत 30.24 करोड़ रुपये तय हुई थी। 2010 में पहला ठेका 6.89 करोड़ रुपये में यूनिटी कंस्ट्रक्शन, मुंबई को दिया गया, लेकिन फंड की कमी और जमीन न मिलने के कारण 2014 में यह रद्द करना पड़ा। तब तक 4.58 करोड़ रुपये खर्च हो चुके थे। 2015 में बचा हुआ काम पूरा करने के लिए 5.94 करोड़ रुपये का नया ठेका पृथ्वी कंस्ट्रक्शन, मुंबई को दिया गया। लेकिन जमीन न मिलने के कारण यह काम भी पूरा नहीं हो सका और 2018 में इसे भी रद्द कर दिया गया।
अब यात्री टर्मिनल बनाने की योजना, लेकिन मंजूरी अटकी
रेलवे ने परेल वर्कशॉप को बंद कर वहां यात्री टर्मिनल बनाने का फैसला किया। इसके लिए 24 फरवरी 2020 को विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) भेजी गई, लेकिन अब तक मंजूरी नहीं मिली। समिति ने मंत्रालय से पूछा कि डीपीआर को मंजूरी देने में इतनी देरी क्यों हो रही है? साथ ही मंत्रालय से यह भी पूछा कि क्या नए यात्री टर्मिनल में ट्रेनों के संचालन की पूरी योजना बनी है?
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रेलवे की सफाई, समिति ने मांगी पूरी जानकारी
वहीं इस पर रेल मंत्रालय ने कहा कि आगे से टेंडर जारी करने से पहले यह पक्का किया जाएगा कि काम के लिए जरूरी जगह उपलब्ध हो। समिति ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि जब पहली कंपनी समय पर काम पूरा नहीं कर पाई, तो दूसरी कंपनी को ठेका क्यों दिया गया? अब समिति ने रेलवे से परेल टर्मिनस के पहले चरण की योजना और डीपीआर मंजूरी में हो रही देरी की पूरी जानकारी देने को कहा है।