Pappu Yadav On FIR: सनातन धर्म के कथित अपमान के मामले में दर्ज एफआईआर पर निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अखिलेश यादव कभी एफआईआर से नहीं डरते। साथ ही दावा किया कि उन्हें 10 बार जान से मारने की धमकी मिल चुकी है। आखिर इस एफआईआर का पूरा मामला क्या है और पप्पू यादव ने चंपत राय का जिक्र क्यों किया? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
सनातन धर्म के कथित अपमान के मामले में दर्ज एफआईआर पर निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने तीखा पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अखिलेश यादव कभी एफआईआर से नहीं डरते। पप्पू यादव ने यह भी दावा किया कि उन्हें जान से मारने की 10 धमकियां मिल चुकी हैं। उन्होंने कहा कि अब ऐसे मामलों से डरने का सवाल ही नहीं है। साथ ही उन्होंने कहा कि वह पूरे मामले की शिकायत लोकसभा अध्यक्ष से करेंगे।
विज्ञापन
पप्पू यादव ने कहा कि असली सवाल चंपत राय से जुड़ा है। उनके मुताबिक राहुल गांधी और अखिलेश यादव देश की आस्था को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उन पर लगातार हमले किए जा रहे हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी सदन की मर्यादा का अपमान नहीं किया और न ही किसी को अपशब्द कहे। इसलिए उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर का कोई आधार नहीं है।
एफआईआर का मामला क्या है?
यह मामला संसद परिसर में विपक्ष के विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। वाराणसी पुलिस ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, निर्दलीय सांसद पप्पू यादव, समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद और अन्य विपक्षी सांसदों के खिलाफ सनातन धर्म का कथित अपमान करने और धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में एफआईआर दर्ज की थी। यह मामला कोतवाली थाने में कुछ संतों की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया था।
विरोध प्रदर्शन में क्या हुआ था?
विपक्षी दलों ने संसद में राम मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी और छात्र प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में प्रदर्शन किया था। इस दौरान एक सांकेतिक नाटक भी किया गया। मकर द्वार के पास दानपात्र रखे गए, जिनमें राहुल गांधी समेत कई सांसदों ने पैसे डाले। वहीं भगवा वस्त्र पहने पप्पू यादव को सांकेतिक रूप से मंदिर के पुजारी की भूमिका में दानपात्र का पैसा अपनी जेब में रखते हुए दिखाया गया। इसी प्रदर्शन को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई थी।
शिकायत में क्या आरोप लगाए गए थे?
शिकायतकर्ताओं का आरोप था कि संसद में हुए इस सांकेतिक प्रदर्शन से सनातन धर्म का अपमान हुआ और करोड़ों लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं। शिकायत के आधार पर वाराणसी पुलिस ने मामला दर्ज किया। वहीं पप्पू यादव का कहना है कि यह केवल एक राजनीतिक विरोध प्रदर्शन था। उनका दावा है कि न तो किसी धर्म का अपमान किया गया और न ही सदन की गरिमा का उल्लंघन हुआ। अब इस मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और कानूनी प्रक्रिया दोनों जारी हैं।