मिडिल क्लास यानी मध्य वर्ग यानी वो लोग जो न तो बहुत अमीर होते हैं और न ही गरीब। नतीजतन, यही लोग आम आदमी की परिपाटी में सटीक बैठते हैं। एक नए शोध की मानें तो मध्य वर्ग का वर्गीकरण अब बदल गया है। अब इस वर्ग में ठेले पर पानी पुरी बेचने वाले से लेकर तमाम रेहड़ी वाले, डोसा वाले, बढ़ई, वेल्डिंग करने वाले, धोबी, ड्राइवर और केबल टीवी की मिस्त्री तक आते हैं। अध्ययन के मुताबिक भागम-भाग भरी जिंदगी इसके पीछे एक वजह है।
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक मुंबई विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ इकॉनोमिक्स की एक टीम ने इन लोगों पर शोध किया, जिसमें पाया गया कि जो लोग पहले गरीबों में गिने जाते थे उनका स्टेटस बदल गया है। वे लगातार तेज रफ्तार हो रही जिंगदी में खुद को गरीबी से निकाल रहे हैं और ठीक ठाक कमाने वालों में शामिल होकर मध्य वर्ग का हिस्सा होते जा रहे हैं।
शोधार्थियों ने करीब 800 लोगों पर अध्ययन के बाद यह निष्कर्ष निकाला है। शोध के दौरान इन लोगों के रहन-सहन और घर खर्च को मानदंड बनाया गया था।