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मणिपुर हिंसा: केंद्र सरकार ने पांचवीं बार जांच आयोग का बढ़ाया कार्यकाल, जानें कब तक सौंपनी होगी रिपोर्ट

Fri, 15 May 2026 10:40 AM IST
Pavan न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

केंद्र सरकार ने मणिपुर हिंसा की जांच के लिए गठित आयोग को छह महीने का विस्तार दिया है। आयोग को अब 20 नवंबर, 2026 तक अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी। इस हिंसा में 260 से अधिक लोगों की जान गई थी। इस तीन सदस्यीय पैनल का गठन 4 जून, 2023 को हुआ था।
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मणिपुर हिंसा - जांच आयोग को फिर मिला समय - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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करीब तीन साल पहले मणिपुर में भड़की जातीय हिंसा की जांच कर रहे आयोग को केंद्र सरकार ने एक बार फिर रिपोर्ट जमा करने के लिए छह महीने का अतिरिक्त समय दे दिया है। अब यह आयोग अपनी रिपोर्ट 20 नवंबर 2026 तक सौंप सकेगा। गृह मंत्रालय की ओर से जारी सरकारी अधिसूचना में इसकी जानकारी दी गई है। यह जांच आयोग 4 जून 2023 को बनाया गया था। उस समय मणिपुर में मई 2023 से शुरू हुई हिंसा ने पूरे राज्य को हिला दिया था। हिंसा में 260 से ज्यादा लोगों की जान चली गई थी, जबकि हजारों लोग बेघर हो गए थे। कई घरों, दुकानों और संपत्तियों को आग के हवाले कर दिया गया था।
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हिंसा फैलने के पीछे के कारणों की जांच जारी
तीन सदस्यीय इस आयोग की शुरुआत में अध्यक्षता पूर्व गौहाटी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अजय लांबा कर रहे थे। हालांकि उन्होंने 28 फरवरी 2026 से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद 1 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश बलबीर सिंह चौहान ने आयोग की कमान संभाली। आयोग यह जांच कर रहा है कि 3 मई 2023 को शुरू हुई हिंसा आखिर किन परिस्थितियों में फैली और इसके पीछे क्या कारण थे।
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दरअसल, उस दिन पहाड़ी जिलों में 'जनजातीय एकजुटता मार्च' निकाला गया था। यह प्रदर्शन मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की मांग के विरोध में आयोजित किया गया था। इसी के बाद राज्य में बड़े पैमाने पर हिंसा फैल गई। हिंसा से पहले भी राज्य में तनाव बना हुआ था। खास तौर पर आरक्षित वन भूमि से कुकी गांवों को हटाने की कार्रवाई को लेकर कई छोटे आंदोलन और विरोध प्रदर्शन हुए थे। बाद में यही तनाव बड़े संघर्ष में बदल गया।
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मणिपुर सरकार की सिफारिश पर आयोग का गठन
केंद्र सरकार ने मणिपुर सरकार की सिफारिश पर इस आयोग का गठन किया था। आयोग यह भी जांच कर रहा है कि हिंसा रोकने और हालात संभालने में प्रशासन की ओर से कोई लापरवाही हुई थी या नहीं। साथ ही यह देखा जा रहा है कि सरकारी कदम कितने प्रभावी थे और लोगों की शिकायतों में कितनी सच्चाई है। बता दें कि, आयोग को रिपोर्ट सौंपने के लिए पहले भी कई बार समय बढ़ाया जा चुका है। इससे पहले सितंबर 2024, दिसंबर 2024, मई 2025 और दिसंबर 2025 में भी इसकी समयसीमा बढ़ाई गई थी। अब पांचवीं बार आयोग को नया विस्तार मिला है।

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