पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव कल होने हैं लेकिन यहां व्यापक हिंसा और हत्याओं का खूनी खेल अभी चल रहा है। बंगाल के राज्यपाल बोस हिंसाग्रस्त क्षेत्रों का दौरा कर चुके हैं, वहीं उन्होंने बंगाल चुनाव आयोग से उम्मीदवारों पर हमले और हत्याओं को लेकर संज्ञान लेने की बात कही थी। यह चुनाव 2024 के लोकसभा चुनाव से भी जोड़कर देखा जा रहा है। 22 जिला परिषदों, 9,730 पंचायत समितियों और 63,229 ग्राम पंचायतों की लगभग 928 सीटों के लिए प्रतिनिधियों को चुनने के लिए लगभग 5.67 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।
कूचबिहार में भाजपा उम्मीदवार पर जानलेवा हमला
वहीं चुनाव से एक दिन पहले कूचबिहार में भाजपा उम्मीदवार पर जानलेवा हमला हुआ, जिसमें वह बुरी तरह से घायल हो गया। भाजपा ने टीएमसी पर हमले का आरोप लगाया है। घटना दिनहाटा के बामनहाट ग्राम पंचायत के कालमाटी इलाके में हुई। घायलों को फिलहाल कूचबिहार के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
आठ जून को चुनावों की घोषणा के दिन से ही राज्य के विभिन्न हिस्सों में व्यापक हिंसा की खबरें आईं थी, जिसमें एक किशोर सहित एक दर्जन से अधिक लोगों की मौत हो गई। इस चुनाव की अहमियत का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि टीएमसी की मुखिया और बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने पार्टी के अभियान का नेतृत्व किया।
2018 के पंचायत चुनाव में टीएमसी ने जीती थी निर्विरोध सीटें
पिछले 2018 के पंचायत चुनाव में टीएमसी ने लगभग 34 प्रतिशत सीटें निर्विरोध जीत ली थीं। वहीं भाजपा की तरफ से बंगाल प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दिलीप घोष और विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने भाजपा के अभियान का नेतृत्व किया। साथ ही कांग्रेस की तरफ से कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी और सीपीआई (एम) के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने अपनी पार्टियों के संबंधित चुनाव अभियान का नेतृत्व किया।
बंगाल चुनाव आयोग के अधिकारियों ने कहा कि चुनाव के लिए लगभग 65,000 सक्रिय केंद्रीय पुलिस कर्मी और 70,000 राज्य पुलिस कर्मी तैनात किए जाएंगे। अभिषेक बनर्जी ने कहा कि ऐसा लगता है कि भाजपा भूल गई है कि लोग वोट देते हैं, केंद्रीय बलों को नहीं। अगर भाजपा को लोगों का समर्थन नहीं है, तो चाहे आप कितनी भी केंद्रीय ताकतें मांग लें, जनादेश नहीं बदलेगा।
2013 के पंचायत चुनावों में, केंद्रीय बलों की भारी तैनाती के बावजूद, टीएमसी ने 85 प्रतिशत से अधिक सीटें जीती थीं। 2018 के ग्रामीण चुनावों में, टीएमसी ने 90 प्रतिशत पंचायत सीटें और सभी 22 जिला परिषदें जीतीं। हालाँकि, ये चुनाव व्यापक हिंसा और हत्या से प्रभावित हुए थे। वहीं इस बार भी विपक्ष ने आरोप लगाया कि उन्हें कई सीटों पर नामांकन दाखिल करने से रोका गया।
भाजपा बोली इस बार टीएमसी को नहीं जीतने देंगे
बंगाल प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने कहा कि टीएमसी ग्रामीण चुनावों को 2018 की पुनरावृत्ति बनाना चाहती है, लेकिन हम इस बार ऐसा नहीं होने देंगे। भाजपा टीएमसी को हरा देगी। वहीं कांग्रेस अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि टीएमसी के राज में किसी भी प्रकार के विरोध के लिए कोई जगह नहीं है, इससे अराजकता पैदा हुई है। वहीं सीपीआई (एम) नेता सुजन चक्रवर्ती ने कहा कि लोग चुनाव में टीएमसी और भाजपा दोनों को खारिज कर देंगे।
पंचायत चुनाव के दौरान सड़क पर रहेंगे बंगाल के राज्यपाल
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने ग्रामीण बंगाल के लोगों से पंचायत चुनाव में बिना चूके अपने मताधिकार का प्रयोग करने का आग्रह करते हुए शुक्रवार को कहा कि वह मतदान के दौरान अपनी टीम के साथ सड़कों पर रहेंगे। राज्यपाल ने शनिवार के पंचायत चुनावों को मतपत्र और गोलियों के बीच की लड़ाई बताया और कहा कि वह पूरे राज्य में स्थिति पर नजर रखेंगे और सुधारात्मक कदम उठाएंगे।