पाकिस्तान के मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी फंडिंग पर नजर रखने वाली वैश्विक संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की ग्रे सूची से बाहर निकलने के आसार नहीं हैं। पाक भारत के मोस्ट वांटेड आतंकी मौलाना मसूद अजहर और हाफिज सईद पर कार्रवाई न करने समेत एफएटीएफ के छह अहम दायित्वों को पूरा करने में नाकाम रहा है।
वहीं आधिकारिक सूची से अचानक चार हजार आतंकियों का नाम गायब होने से भी उसकी मुसीबतें बढ़ी हैं। एक अधिकारी ने रविवार को बताया कि एफएटीएफ की वर्चुअल बैठक 21 से 23 अक्तूबर को होगी, जिसमें पाकिस्तान को लेकर अंतिम फैसला होगा।
अधिकारी ने बताया कि एफएटीएफ ने पाकिस्तान को 27 दायित्व का एक्शन प्लान दिया था, जिसमें से पाक 21 ही पूरा कर सका है। वहीं, अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी भी उसकी सरजमीं से चल रहे आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर इस्लामाबाद से संतुष्ट नहीं हैं। अगर पाकिस्तान ग्रे सूची में बरकरार रहता है तो उसके लिए आईएमएफ, एशियाई विकास बैंक और विश्व बैंक जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से वित्तीय सहायता मिलना मुश्किल होगा।
इसके साथ ही बैठक में यह भी देखा जाएगा कि क्या पाकिस्तानी अधिकारी अवैध धन और मूल्य हस्तांतरण सेवाओं के खिलाफ सहयोग कर रहा है या नहीं। इससे पहले, एफएटीएफ की बैठक जून में होनी थी, लेकिन कोरोना महामारी के कारण इसे स्थगित कर दिया गया था।
39 में से 12 वोट की जरूरत
पाकिस्तान को ग्रे सूची से बाहर निकलने के लिए 39 देशों में से 12 के वोट की जरूरत पड़ेगी। वहीं, काली सूची से बचने के लिए उसे तीन देशों का समर्थन चाहिए होगा। हालांकि चीन, तुर्की और मलयेशिया के समर्थन के चलते वह इससे बच जाएगा। फिलहाल उत्तर कोरिया और ईरान एफएटीएफ की काली सूची में शामिल हैं। पाकिस्तान को जून, 2018 में ग्रे सूची में डाला गाया था।