पाकिस्तान ने भारत से उसके अधिकारियों को सिंधु नदी घाटी में चल रही भारतीय परियोजनाओं का निरीक्षण करने के लिए जाने की इजाजत मांगी है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, केंद्र ने सिंधु जल संधि (आईडब्ल्यूटी) के प्रावधानों के तहत इसकी व्यवस्था करने की बात कही है। पाकिस्तान ने यहां दोनों देशों के बीच चल रही स्थायी सिंधु आयोग (पीआइसी) की दो दिवसीय बैठक के दौरान शुक्रवार को ये आग्रह किया।
सूत्रों के अनुसार, शुक्रवार को 114वीं पीआइसी बैठक के दौरान दोनों देश सिंधु नदी पर जम्मू-कश्मीर में भारत की दो जलविद्युत परियोजनाओं पाकल दुल और लोअर कालनई पर अपनी-अपनी बात पर अड़े रहे। हालांकि दोनों देशों के बीच चल रहे तनावपूर्ण संबंधों के बीच इस मुद्दे पर बैठक में सौहार्दपूर्ण तरीके से बातचीत हुई। हालांकि इन दो परियोजनाओं पर पाकिस्तान के विरोध के बीच जम्मू-कश्मीर में एक अन्य भारतीय जलविद्युत परियोजना रत्ले (850 मेगावाट) पर बात ही नहीं हो पाई, जिसके डिजाइन पर भी इस्लामाबाद को आपत्ति है।
भारत ने इस पर वार्ता की पेशकश की, लेकिन पाक प्रतिनिधिमंडल ने इसके लिए पहले ही आयोग से ऊंचे यानि सचिव स्तर पर वार्ता जारी होने की बात कहकर प्रस्ताव नकार दिया। भारतीय प्रतिनिधिमंडल में सिंधु जल आयुक्त पीके सक्सेना, तकनीकी एक्सपर्ट और विदेश मंत्रालय के प्रतिनिधि थे, जबकि छह सदस्यीय पाक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व सैयद मुहम्मद मेहर अली शाह कर रहे हैं।
यह है विवाद
सिंधु की सहायक नदी चिनाव की घाटी पर हैं भारत की दो परियोजनाएं
पाकल दुल में 1000 मेगावाट व लोअर कालनई में 48 मेगावाट जलविद्युत बनेगी
पाकिस्तान इन परियोजनाओं के लिए बांध बनाने को बताता है सिंधु संधि का उल्लंघन
1960 में हुई सिंधु जल बंटवारा संधि के तहत भारत इन परियोजनाओं के डिजाइन को बताता है सही
दोनों देश एक-दूसरे के यहां की स्थिति जानने के लिए इस संधि के तहत निरीक्षण करते रहते हैँ
118 दौरे दोनों देशों में हुए हैं, जिसमें भारत में पाक ने 70 बार और पाक में भारत ने 48 दौरे किए
2014 में आखिरी बार पाकिस्तान के अधिकारियों ने सिंधु नदी घाटी की जांच की थी
दोनों देश साल में कम से कम एक बार स्थायी सिंधु आयोग की बैठक में वार्ता करते हैं
पिछली बार मार्च 2017 में इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच बैठक आयोजित की गई थी
सिंधु संधि पर एक नजर
06 नदियों ब्यास, रावी, सतलुज, सिंधु, चिनाव और झेलम के जल बंटवारे पर है संधि
03 पश्चिमी नदियों सिंधु, झेलम और चिनाव का पानी इससे पाकिस्तान के लिए संरक्षित होता है
03 पूर्वी नदियों ब्यास, रावी और सतलुज का पानी इससे भारत के लिए संरक्षित होता है