पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की कश्मीर और नागरिकता संशोधन अधिनियम पर जेनेवा में की गई टिप्पणी पर भारत ने कड़ा विरोध जताया है। भारत ने कहा है कि इमरान खान वैश्विक मंचों का हमेशा दुरुपयोग करते हैं और जेनेवा में उनकी टिप्पणी भारत के आंतरिक मामलों में दखल है। पाकिस्तान को इस तरह के हस्तक्षेप से बाज आना चाहिए।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की टिप्पणी पर जवाब देते हुए विदेश मामलों के मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि इमरान खान ने एक वैश्विक मंच से एक बार फिर अपने संकीर्ण राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने का काम किया है। उन्होंने कहा कि अब पूरे विश्व समुदाय को यह बात स्पष्ट हो जानी चाहिए कि पाकिस्तान इसी प्रकार हमेशा वैश्विक मंचों का दुरुपयोग करता है।
उन्होंने कहा कि पूरा विश्व समुदाय जानता है कि पाकिस्तान ने अपने यहां के अल्पसंख्यकों को हमेशा सताया है और उनमें से अनेक भारत में शरण लेते रहे हैं। अब इमरान खान चाहते हैं कि विश्व समुदाय पाकिस्तान की 1971 में बांग्लादेश में की गई कार्रवाई को भूल जाए जिसमें पाकिस्तान ने वहां के निवासियों पर अत्याचार किए थे।
इसके पूर्व, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने जेनेवा में कहा कि कश्मीर में मानवाधिकारों का हनन हो रहा है और विश्व समुदाय को इसका संज्ञान लेना चाहिए। उन्होंने भारतीय संसद द्वारा हाल ही में बनाए गए नागरिकता संशोधन अधिनियम का मुद्दा भी उठाया।