चीन में हो रहे शंघाई सहयोग संगठन की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पाकिस्तानी राष्ट्रपति ममनून हुसैन से हाथ मिलाना चर्चा में है। हालांकि दोनों देशों के बीच समग्र वार्ता की बात फिलहाल दूर की कौड़ी ही दिख रही है। पाकिस्तान के साथ समग्र वार्ता हो या नहीं, यह जुलाई में वहां होने वाले आम चुनाव के बाद आने वाली नई सरकार के रुख पर निर्भर करेगा। आतंकवाद के खिलाफ ठोस पहल के बाद ही भारत वार्ता के लिए राजी होगा।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, राजनीतिक चैनल के इतर पाकिस्तान से कूटनीतिक स्तर पर संवाद कभी खत्म नहीं हुआ। सेना, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और कूटनीतिक माध्यमों से बातचीत होती रही है। हालांकि इन बातचीत में आतंकवाद के मामले में पाकिस्तान की ओर से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं आई है। इसके अलावा वहां राजनीतिक अस्थिरता का माहौल है और नवाज शरीफ, उनके भाई चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित किए जा चुके हैं।
इसके अलावा मौजूदा नेतृत्व का देश में नवाज की तरह विभिन्न क्षेत्रों में मजबूत साख नहीं है। ऐसे में भारत की नजर वहां के आम चुनाव पर है। चुनाव में ऊंट किस करवट बैठेगा, यह किसी को पता नहीं है। इसलिए भारत देखो और इंतजार करो की रणनीति पर काम कर रहा है। नई सरकार के गठन और आतंकवाद के प्रति उसके रुख से ही तय होगा कि अगले आम चुनाव से पहले मोदी सरकार पाकिस्तान से वार्ता के लिए राजी होगी या नहीं।
यहां भी चुनाव है अहम
भारत के चुनावों में पाकिस्तान से जुड़ा मुद्दा शुरू से ही अहम रहा है। चूंकि यहां भी अगले साल आमचुनाव होने हैं। ऐसे में मोदी सरकार भी नहीं चाहेगी कि आतंकवाद पर पाकिस्तान से ठोस आश्वासन मिले बिना वार्ता की मेज पर बैठा जाए। वैसे भी पाक के तत्कालीन पीएम नवाज शरीफ के यहां एक शादी समारोह में अचानक पहुंच कर पीएम मोदी विपक्ष का निशाना झेल चुके हैं। लगातार सीज फायर उल्लंघन और आतंकियों की घुसपैठ के बीच मोदी सरकार चुनावी वर्ष में एकतरफा वार्ता करने फैसला लेने की स्थिति में नहीं है।
हाथ मिलाना महज औपचारिकता
पीएम मोदी और पाक राष्ट्रपति के हाथ मिलाने की घटना को महज शिष्टाचार के रूप में देखा जा रहा है। सरकारी सूत्रों का कहना है कि हाथ मिलाने के बाद पीएम मोदी ने आतंकवाद पर जिस प्रकार पाकिस्तान पर परोक्ष हमला बोला, अफगानिस्तान में शांति बहाली के प्रयासों पर पानी फेरने का परोक्ष आरोप लगाया, उससे भी साफ है कि भारत फिलहाल आतंकवाद के जारी रहते वार्ता नहीं संबंधी नीति से पीछे हटने वाला नहीं है।