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करतारपुर कॉरिडोर के जरिए आईएसआई बना रही नापाक मंसूबे

Mon, 08 Jul 2019 08:24 AM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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फाइल फोटो
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भारत और पाकिस्तान के बीच 14 जुलाई को करतारपुर कॉरिडोर के संचालन को लेकर बैठक होने वाली है। इससे पहले विदेश मंत्रालय पड़ोसी देश द्वारा उन सिखों की तैनाती को लेकर चिंतित है, जिनका इस्तेमाल करके पाक खालिस्तान समर्थक अभियान को हवा दे रहा है। इस मुद्दे को लेकर भारत पाकिस्तान के सामने अपनी बात रखेगा।

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इस चिंता का कारण है 28 जून, 2019 को फरीदकोट पुलिस द्वारा 24 साल के युवक सुखविंदर सिंह सिद्धू की गिरफ्तारी। जो 2016 से पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के लिए जासूसी कर रहा था। आरोप है कि पाकिस्तानी हैंडलर के इशारे पर सिद्धू मोगा आर्मी कैंट के पास रहने लगा और भारतीय सेना की गतिविधियों की जानकारी उन्हें देता था। इसके अलावा वह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए पंजाब के सिखों के बीच रेफरेंडम को लेकर जनमत संग्रह बनाने की कोशिश करता था।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार सिद्धू की नियुक्ति रावलपिंडी ने उस समय की जब वह भारत से एक जत्थे का हिस्सा बनकर पाकिस्तान गया था। यह जत्था पाक में स्थित सिखों के पवित्र स्थल के दर्शनों के लिए नवंबर 2015 में गुरू पर्व के मौके पर गया था। विदेश मंत्रालय के अनुसार पाकिस्तान भारत से साल में चार बार जाने वाले जत्थों का गलत इस्तेमाल कर रहा है।
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भारत के एक वरिष्ठ राजनयिक ने कहा, 'हमने इस मसले को कई बार पाकिस्तान के सामने उठाया है। केवल भारतीय सिख जत्थे को ही टारगेट करके तथाकथित रेफरेंडम अभियान के लिए नियुक्त नहीं किया जाता बल्कि कनाडा, ब्रिटेन और जर्मनी से सीधे पाकिस्तान आने वाले सिखों को भड़काकर उनकी नियुक्ति की जाती है। इन अभियानों की फंडिंग ज्यादातर इस्लामाबाद करता है।' 

सिद्धू पहला ऐसा शख्स नहीं है जिसे पाकिस्तानी एजेंसी ने नियुक्त किया है। इससे पहले 2013 में तलविंदर सिंह, 2012 मे सुखप्रीत कौर और सूरज पाल सिंह, 2009 में नायब सिंह और भोला सिंह को पंजाब पुलिस ने रावलपिंडी के इशारे पर जासूसी गतिविधियां करने के आरोप में गिरफ्तार किया था।

करतारपुर कॉरिडोर के शुरू हो जाने पर भारतीय एजेंसियां यहां जाने वाले श्रद्धालुओं की कड़ी निगरानी करेंगी। विदेश मंत्रालय को लगता है कि यहां पाकिस्तान एजेंसी द्वारा किसी जासूस को नियुक्त करने के आसार कम हैं क्योंकि श्रद्धालुओं को उसी दिन वापस अपने देश आना होगा।

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी जत्थे में जाने वाले केवल सिख युवाओं को जासूसी के लिए ही नियुक्त नहीं करता है बल्कि भारत में स्थित पंजाब में आतंकी गतिविधियों के लिए भी टारगेट करती है। इसका उदाहरण जगरूप सिंह उर्फ रूपा है जिसे पाकिस्तान ने हथियारों का प्रशिक्षण दिया था। वह नवंबर 2016 में जत्थे के साथ पाकिस्तान गया था।

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