शिमला की हसीन वादियों में अब पूरी की पूरी ट्रेन ही पारदर्शी चलेंगी। रेलवे छह कोच वाली दो विस्टाडोम ट्रेन का निर्माण कर रहा है। इसी साल सितंबर महीने के पहले ही पूरे तरीके से पारदर्शी कोच तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।
जी हां! शिमला के प्राकृर्तिक सौदर्य का मजा लेने के लिए अब आपकों पारदर्शी कोच में यात्रा करने के लिए लंबे दिनों का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। कालका-शिमला नैरो गेज ट्रैक पर स्विट्जरलैंड की तर्ज पर चल रही एक विस्टाडोम कोच की मांग को देखते हुए इस तरह के 12 कोच तैयार किए जा रहे हैं।
शिवालिक शृंखलाओं के प्राकृतिक सौंदर्य का मजा पारदर्शी शीशे की बड़ी-बड़ी खिड़कियों और शीशे की छत वाली विस्टाडोम कोच में बैठकर ले सकेंगे। खास बात यह है कि यह कोच वातानुकूलित तो होंगे ही साथ ही इसमें शौचालय की भी व्यवस्था होगी।
उत्तर रेलवे के प्रिंसिपल चीफ इंजीनियर अरुण अरोड़ा ने बताया कि रेल मंत्री पीयूष गोयल ने पिछले साल शिमला दौरे के दौरान पर्यटकों की सुविधा के लिए कई बड़े सुझाव दिए थे। इनमें ज्यादा से ज्यादा संख्या में विस्ताडोम कोच के संचालन का भी था।
उन्होंने बताया कि कालका-शिमला रूट पर छह कोच वाली टॉय ट्रेन चलती है। रेलवे 12 कोच को अपग्रेड कर विस्ताडोम कोच के रूप में तब्दील कर रहा है। जरूरत हुई तो इस ट्रैक पर दो विस्ताडोम ट्रेन चलाई जा सकती है। यात्रियों की मांग को देखते हुए सितंबर के पहले 12 कोच इस रूट पर चलने लगेंगी।
विस्टाडोम कोच वातानुकूलित है। इसकी खिड़कियां मोटे पारदर्शी शीशे की हैं जो सामान्य से कहीं ज्यादा बड़ी हैं। कोच की छत भी शीशे की होगी। कोच का इंटीरियर भी खास तौर पर डिजाइन किया जा रहा है। कोच के दरवाजे और खिड़कियों में कठोर शीशे का इस्तेमाल किया गया है। खिड़कियों की मजबूती के लिए स्टील रेलिंग लगाई जाएंगी। एलईडी लाइट से लैस किया जा रहा है।