पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर में लोकतांत्रिक प्रक्रिया और आने वाले पंचायत चुनाव को नाकाम करने की कोशिश में तमाम उपद्रव और आतंकी हमले को अंजाम दे रहा है।
सेना और रक्षा मंत्रालय का मानना है कि पिछले कुछ महीनों में सेना और सुरक्षा बलों का नुकसान जरुर हुआ है। लेकिन आतंकवादियों को काबू करने में खासी सफलता भी हासिल हुई है। मंत्रालय के मुताबिक सेना, केंद्रीय सुरक्षा बल और जम्मू-कश्मीर पुलिस पूरे तालमेल के साथ काम कर रही है।
रक्षा मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक शनिवार को
जम्मू के36 ब्रिगेड के कैंप पर हमला करने में आतंकियों को कामयाबी मिल गई है। लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि सुरक्षा बल का हालात पर नियंत्रण कमजोर पड़ गया है।
सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तान लोकतंत्र पर यकीन नहीं करता। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (
पीओके) में चुनाव नहीं होते। पाक यहां भी वहीं हालात बनाए रखना चाहता है।
कश्मीर में लोकतंत्र की बहाली को पाकिस्तान अपनी हार के नजरिए से देखता है। उसकी कोशिश है कि आने वाले दिनों में होने वाले पंचायत चुनाव का महौल नहीं बनने दे।
सूत्रों के मुताबिक राज्य में पीडीपी-भाजपा गठबंधन की सरकार पाकिस्तान को पसंद नहीं आ रहा। यही वजह है कि राज्य में अशांति और असमंजस का महौल पैदा कर सरकार को कमजोर साबित करने की कोशिश लगातार जारी है।
सेना
पाकिस्तान की इस मंशा को अच्छी तरह समझ रहा है। लिहाजा राज्य में लोकतांत्रिक मूल्यों को बरकरार रखने में कोई कोताही नहीं बरती जा रही है। इसकेलिए केंद्र विभिन्न मंत्रालयों के साथ मिल कर काम कर रहा है।