पाकिस्तान जासूसी के लिए पूर्व सैनिकों को फांसने की रणनीति पर अमल कर रहा है। भारतीय नौसेना के पूर्व अफसर कुलभूषण यादव के कबूलनामे का कथित वीडियो जारी कर भारत को बदनाम करने की पाकिस्तानी कोशिश असफल हो चुकी है।
सच यह है कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों की ओर से आतंकियों के साथ पाकिस्तानी जासूसों की भी घुसपैठ कराई जाती है। सेना और बीएसएफ की मुस्तैदी से हर साल डेढ़ दर्जन से अधिक पाकिस्तानी जासूस पकड़े जाते हैं। तीन साल में पाकिस्तान सेना के 46 पूर्व अधिकारी जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किए गए हैं।
गृह मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने इस साल पाकिस्तान इंटेलीजेंस ऑपरेटिव (पीआईओ) के जरिए जासूसी के लिए सेना के अधिकारियों की भारतीय सीमा में घुसपैठ कराने की कई बार कोशिश की।
पीआईओ के चंगुल में फंसे आठ पूर्व सैनिकों को सुरक्षा बलों ने गिरफ्तार किया है। पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में इस साल अब तक छह पूर्व सैनिक गिरफ्तार किए गए हैं।
पीआईओ ने इन पूर्व सैनिकों और वर्तमान में कार्यरत सैन्य कर्मियों से नौकरी, छात्रवृत्ति और पैसे का लालच देकर संपर्क किया। पीआईओ चंगुल में फंसे इन पूर्व सैनिकों से सेवारत कर्मियों से संपर्क करने को कहता है ताकि गोपनीय सूचनाएं जुटाई जा सके।
इन खतरों से निपटने के लिए सेना और गृह मंत्रालय ने अब सैनिकों और सुरक्षा बलों के जवानों को विदेशी खुफिया आपरेटिव से सतर्क रहने के लिए सचेत करना शुरू किया है। इसके अलावा आईएसआई के नापाक इरादों के निपटने के लिए सेना ने सुव्यवस्थित और बहुआयामी रणनीति पर काम शुरू किया है।
इसमें घुसपैठ और सीमा पार होने से होने वाली अवैध गतिविधियों पर अंकुश के लिए चौकसी बढ़ाई गई है। पाकिस्तानी एजेंटों को घुसपैठ से रोकने के लिए सूचना तंत्र को मजबूत किया गया है। जम्मू कश्मीर समेत सभी सीमावर्ती राज्यों की एजेंसियों से केंद्रीय एजेंसियों के बेहतर तालमेल के लिए भी रणनीति तय की गई है।