लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और जमाद-उद-दावा जैसे संगठनों की आतंकी फंडिंग रोकने में विफल रहे पाकिस्तान पर ग्रे सूची का संकट बरकरार रहेगा। आतंकी फंडिंग पर नजर रखने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था वित्तीय कार्रवाई बल (एफएटीएफ) की फ्लोरिडा में रविवार को हुई बैठक में सामने आया कि पाकिस्तान प्रस्तावित 27 कार्रवाइयों में से 25 करने में विफल रहा। एफएटीएफ ने पाकिस्तान से 70 लाख डॉलर राशि के इस्तेमाल पर जवाब मांगा था, यह राशि मुंबई धमाकों के मास्टर माइंड हाफीज सईद के संगठन द्वारा संचालित स्कूल, मदरसों, अस्पतालों और एंबुलेंस सेवा के लिए हुआ था।
2018 में डाला गया ग्रे सूची में
पाकिस्तान को जून 2018 में ग्रे सूची में डाला था। अक्टूबर 2018 और फरवरी 2019 में हुए रीव्यू में भी पाक को राहत नहीं मिली। पाक एफएटीएफ की सिफारिशों पर काम करने में विफल ही रहेगा।
आर्थिक संकट से राहत नहीं मिलेगी
तंगहाली से जूझ रहे पाकिस्तान के लिये आर्थिक संकट और गहरा सकता है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व बैंक, एशिया विकास बैंक, यूरोपीय संघ भी पाकिस्तान की रेटिंग को कम कर देंगे। इसके साथ ही मूडी, एसएंडपी और फिच की रेटिंग में भी पाकिस्तान को नुकसान होगा।
नहीं चली पाक की चाल
एफएटीएफ को गुमराह करने के इरादे से पाक सरकार की चाल आखिर उलटी पड़ गई। पाक ने लश्कर, जैश, जमाद उद दावा के कुछ सदस्यों की गिरफ्तारियां दिखाईं लेकिन इन सब को सार्वजनिक व्यवस्था रखरखाव अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया न कि आतंक रोधि अधिनियम के तहत। इस लिए एफएटीएफ ने इन गिरफ्तारियों को उचित कार्रवाई नहीं माना। एफएटीएफ गिरफ्तारियां नहीं बल्कि संपत्ति और फंड को जब्त करने की कार्रवाई का समर्थन करता है।
इन संगठनों ने भारत में कई आतंकी हमले कराये
एफएटीएफ ने जिन आतंकी संगठनों की फंडिंग पर लगाम कसने के निर्देश दिये हैं इन्होंने भारत में कई आतंकी हमले कराए हैं। जैसे 2008 के मुंबई बम धमाके, पठानकोट में सेना पर हमला, पुलवामा में सीआरपीएफ जवानों पर हमला।
पाक एडीबी से लेगा 237 अरब रुपये कर्ज
पाकिस्तान ने तंगहाली से निपटने के लिए एशियन विकास बैंक से 237 अरब रुपये (3.4 अरब डॉलर) का कर्ज लेने का फैसला किया है। इसके लिए एडीबी से करार भी हो गया है। पाक पीएम इमरान खान के वित्तीय सलाहकार ने बताया कि कर्ज का 146 अरब रुपये इस साल मिलेगा और बाकी अगले साल।