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दुष्कर्म पीड़िताओं के शब्दों में पढ़िए उनके साथ हुई हैवानियत की दर्दनाक दास्तां

न्यूज डेस्क, नई दिल्ली Published by: shubham Updated Thu, 10 Jan 2019 03:38 PM IST
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Rape Victim - फोटो : Amar Ujala Graphics

आए दिन हम दुष्कर्म की बहुत सी खबरें पढ़ते हैं। एक समय ऐसा था जब ऐसी घटनाओं के बारे में सुनकर हर कोई स्तबध रह जाता था। खबर पर से लोगों की नजरें नहीं हटती थीं। वहीं आज एक समय आ गया है जब दुष्कर्म जैसी घटनाएं लोगों के लिए आम हो गई हैं। खबर पढ़ने वाले जब अखबार खोलते हैं तो ऐसी ही अनेकों घटनाएं उसपर छपी होती हैं। समाज और यहां के लोगों के लिए ये घटनाएं बेशक दो सेकंड के मौन जैसी हों लेकिन जिन लड़कियों और महिलाओं के साथ ये होता है, उनके लिए जीवनभर के मौन के समान होती हैं।

वह अगर दोबारा खड़े होकर जीवन में आगे बढ़ने का सोचें भी तो भी आगे नहीं बढ़ पातीं। तो ऐसे में एक सवाल ये भी उठता है कि जो समाज महिलाओं की सुरक्षा की वकालत करता है, वही समाज उसे सुरक्षा क्यों नहीं दे पाता? क्यों ये कोशिश करता है कि जिस महिला के साथ दुष्कर्म हुआ है, वह इस घटना को कभी भूले ही न?



लड़की को छेड़ने वाले उन गुंडों को पता था कि उसके साथ दुष्कर्म हुआ है। वह लड़की को जानते हैं। उन्हें इससे कोई मतलब नहीं है कि लड़की अपने साथ हुई घटना को भूले, 15 साल की वो लड़की दोबारा दोस्तों के साथ घूमे और खुश रहे। 

उन गुंडों ने उस लड़की का पीछा करना शुरू कर दिया, वह गाजियाबाद के कोचिंग सेंटर से अपने घर की ओर जा रही थी, ज्यादा रात भी नहीं हुई, महज शाम के 5.30 बजे थे। आसपास बहुत से लोग खड़े थे लेकिन जब लड़की के साथ छेड़खानी शुरू हुई तो सब धीरे-धीरे वहां से चले गए। 

गुंडे लड़की का नाम पुकार रहे थे, उसका स्कूटर रोककर चाभी निकाल ली। उसे गलत तरीके से छूने लगे, कुछ लोगों को ये तमाशा अच्छा लग रहा था तो वो वहां खड़े होकर चुपचाप नजारा देखते रहे। गुंडों से पीछा छुड़ा जब लड़की घर की ओर भागी तब भी गुंडों द्वारा उसका पीछा करना जारी रहा। सभी गुंडे जोर-जोर से लड़की को बोल रहे थे, अरे तुम तो वही हो न बुलंदशहर घटना वाली, क्या नहीं हो?  

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Rape Victim - फोटो : Amar Ujala Graphics
आए दिन हम दुष्कर्म की बहुत सी खबरें पढ़ते हैं। एक समय ऐसा था जब ऐसी घटनाओं के बारे में सुनकर हर कोई स्तबध रह जाता था। खबर पर से लोगों की नजरें नहीं हटती थीं। वहीं आज एक समय आ गया है जब दुष्कर्म जैसी घटनाएं लोगों के लिए आम हो गई हैं। खबर पढ़ने वाले जब अखबार खोलते हैं तो ऐसी ही अनेकों घटनाएं उसपर छपी होती हैं। समाज और यहां के लोगों के लिए ये घटनाएं बेशक दो सेकंड के मौन जैसी हों लेकिन जिन लड़कियों और महिलाओं के साथ ये होता है, उनके लिए जीवनभर के मौन के समान होती हैं।

वह अगर दोबारा खड़े होकर जीवन में आगे बढ़ने का सोचें भी तो भी आगे नहीं बढ़ पातीं। तो ऐसे में एक सवाल ये भी उठता है कि जो समाज महिलाओं की सुरक्षा की वकालत करता है, वही समाज उसे सुरक्षा क्यों नहीं दे पाता? क्यों ये कोशिश करता है कि जिस महिला के साथ दुष्कर्म हुआ है, वह इस घटना को कभी भूले ही न?

लड़की को छेड़ने वाले उन गुंडों को पता था कि उसके साथ दुष्कर्म हुआ है। वह लड़की को जानते हैं। उन्हें इससे कोई मतलब नहीं है कि लड़की अपने साथ हुई घटना को भूले, 15 साल की वो लड़की दोबारा दोस्तों के साथ घूमे और खुश रहे। 

उन गुंडों ने उस लड़की का पीछा करना शुरू कर दिया, वह गाजियाबाद के कोचिंग सेंटर से अपने घर की ओर जा रही थी, ज्यादा रात भी नहीं हुई, महज शाम के 5.30 बजे थे। आसपास बहुत से लोग खड़े थे लेकिन जब लड़की के साथ छेड़खानी शुरू हुई तो सब धीरे-धीरे वहां से चले गए। 

गुंडे लड़की का नाम पुकार रहे थे, उसका स्कूटर रोककर चाभी निकाल ली। उसे गलत तरीके से छूने लगे, कुछ लोगों को ये तमाशा अच्छा लग रहा था तो वो वहां खड़े होकर चुपचाप नजारा देखते रहे। गुंडों से पीछा छुड़ा जब लड़की घर की ओर भागी तब भी गुंडों द्वारा उसका पीछा करना जारी रहा। सभी गुंडे जोर-जोर से लड़की को बोल रहे थे, अरे तुम तो वही हो न बुलंदशहर घटना वाली, क्या नहीं हो?  

women crime - फोटो : pexels.com
लड़की कुछ नहीं बोल पाई, वो डरी हुई थी, सहमी हुई थी। घटना जुलाई 2016 की थी। लड़की के परिवार के 6 सदस्य नोएडा से यूपी के शहाजहांपुर जा रहे थे। तभी उनकी गाड़ी रोक ली गई। बदमाशों ने परिवार के पुरुषों को रस्सी से बांध दिया। लड़की और उसकी मां के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया। लड़की की उम्र उस वक्त 13 साल थी। इस खबर ने पूरे देश को हिला दिया था। घर के पुरुषों और पूरे परिवार के साथ होते हुए भी इनके साथ ये घटना हुई।

ये लड़की अकेली ऐसी नहीं है जो खुद के साथ हुई घटना को भूली नहीं है। दुष्कर्म पीड़िताओं को कहा जाता है कि जो भी उनके साथ हुआ वह भूल जाएं। किसी लड़की को बयान बदलने को कहा जाता है, तो किसी से ऐसे सवाल पूछे जाते हैं, जो नहीं पूछे जाने चाहिए। पहले मीडिया भी उनके लिए एक तरह का खतरा ही था, जो उनकी पहचान, उनके नाम और परिवार के लोगों का प्रसारण करता था। शुक्र है कड़े कानूनों का कि अब वो ऐसा नहीं कर सकते। अब पीड़िताओं की पहचान छुपाई जाती है। लेकिन बावजूद कानून के उन्हें एक नहीं बल्कि कई बार शर्म का सामना करना पड़ता है।

शगुफ्ता की कहानी बेहद दर्दनाक है। वह महाराष्ट्र के ठाणे में अपने पति और बच्चे के साथ रहती थी। अगस्त 2017 का वो दिन... जिसे शगुफ्ता अभी तक भूल नहीं पाई है। त्योहार का समय था, तभी उसके इलाके में रहने वाला एक आदमी उनके घर में आ गया और महिला के साथ दुष्कर्म की कोशिश की। महिला ने विरोध करना शुरू कर दिया। वो दरिंदा रुका नहीं उसने शगुफ्ता को तब तक मारा जब तक वह बेहोशी की अवस्था में नहीं आ गई। जब वह विरोध करने की स्थिति में नहीं रही तब उसके साथ दरिंदे ने दुष्कर्म किया। 

बाद में पुलिस ने मामला दर्ज किया और आरोपी को गिरफ्तार किया। अब शुरू हुई शगुफ्ता की कठिन परीक्षा। शगुफ्ता ने बताया, "आरोपी के गिरफ्तार होने के बाद, इलाके के गुंडों ने मुझे कमेंट पास करना शुरू कर दिया और कहने लगे कि मेरा उनके साथ भी संबंध है। एक दिन मेरे पति शराब पीकर घर आए और मुझसे कहने लगे क्या ये सच है? इसके बाद मैं टूट गई।" शगुफ्ता ने लोगों के बीच में जाना छोड़ दिया। उसने लोगों से बातचीत भी बंद कर दी।

शगुफ्ता का कहना है, "दुष्कर्म पीड़िता के लिए कोई जगह नहीं है। समाज उसे जीने नहीं देता। मेरी क्या गलती थी? मैं वो थी जिसपर हमला हुआ, जिसके साथ दुष्कर्म हुआ, लेकिन लोग नहीं चाहते कि मैं फिर से अपने जीवन को नियंत्रित करूं।"

शगुफ्ता बताती है, "मेरे पति ने धीरे-धीरे मुझसे बात करना बंद कर दिया। वह हमेशा गुस्सा रहते थे और बच्चों से भी बात नहीं करते थे। तो एक दिन मैंने कहा कि मुझे मेरी मां के घर छोड़ दो। आज एक साल होने वाला है, बच्चे भी उनके पास हैं और वो मुझे लेने नहीं आए।" चाहे गाजियाबाद की बात करें, ठाणे की या फिर मुंबई की... हर जगह एक ही हालत है।

women crime - फोटो : pexels.com
नैना.. वो कई दिनों तक अपने साउथ मुंबई स्थित घर से बाहर नहीं निकली। वह केवल खाना बनाती, घर का काम करती और अपनी मां की देखभाल। वह केवल घर का सामान लेने के लिए ही बाहर जाती। वह दो साल पहले मार्केटिंग की नौकरी छोड़ चुकी है। इसके बाद किसी भी कंपनी ने उसे नौकरी पर नहीं रखा।

यह सब तब से हो रहा है जब नैना ने अपने बॉस के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। नैना ने आरोप लगाया था कि पुणे के होटल में उसके बॉस ने उसे नशीली दवाई देकर उसके साथ दुष्कर्म किया है। इसके अलावा उसकी वीडियो भी बनाई थी। नैना के दोस्तों ने भी उससे बात करनी बंद कर दी। फिर वह मानसिक तौर पर काफी परेशान हो गई।

जब पवाई पुलिस स्टेशन ने नैना की शिकायत लिखने से मना कर दिया तो उसने कहीं और शिकायत दर्ज कराने का सोचा। जिसके बाद केस पुणे ट्रांसफर किया गया। लेकिन जांच में पुलिस ने कोई सहयोग नहीं दिया।

नैना के कई दोस्तों ने उसके खिलाफ बोलना शुरू कर दिया। वो सब उससे पूछने लगे कि शिकायत दर्ज कराने के पीछे उसका क्या उद्देश्य था? उसका कहना है कि पीड़िता से ही हमेशा सवाल किया जाता है, लेकिन दुष्कर्म के आरोपी से कोई सवाल नहीं करता।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार दुष्कर्म पीड़िताओं के साथ काम करने वाली कार्यकर्ता मोहन कृष्णन का कहना है पुलिस का रवैया उस वक्त से पीड़िता के खिलाफ हो जाता है, जैसे ही वो थाने में कदम रखती है।

उन्होंने कहा, "पीड़िता की शिकायत रिकॉर्ड करने के लिए महिला अफसर शायद ही कभी मौजूद होती हैं। पीड़िता पुरुष अफसर को अपने साथ हुई घटना के बारे में बताते वक्त असहज महसूस करती है। पीड़िता का बयान लिखते समय सही शब्दों का इस्तेमाल करना काफी जरूरी है, जो पुलिस कभी नहीं करती।"

साल 2017 में एक महिला के साथ 8 आदमियों ने सामूहिक दुष्कर्म किया। महिला के 14 साल के बेटे के साथ भी उन बदमाशों ने यौन शोषण किया। उनके खिलाफ नवंबर, 2014 को रेप और पॉक्सो एक्ट की धारा के तहत मामला दर्ज हुआ। लेकिन छह आरोपी आज भी फरार हैं। पुलिस चाहती थी कि वह अपना केस वापस ले लेकिन जब उसने ऐसा करने से मना किया तो उसके साथ मारपीट की गई।

आरोपियों की धमकी और समाज के तानों के बाद महिला ने अपने बेटे के साथ घर छोड़ दिया। उसे कभी हरियाणा के महिला कल्याण विभाग ने काउंसलिंग नहीं दी। जानकारी के लिए बता दें इस खबर में लोगों के नाम बदल दिए गए हैं।
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