आए दिन हम दुष्कर्म की बहुत सी खबरें पढ़ते हैं। एक समय ऐसा था जब ऐसी घटनाओं के बारे में सुनकर हर कोई स्तबध रह जाता था। खबर पर से लोगों की नजरें नहीं हटती थीं। वहीं आज एक समय आ गया है जब दुष्कर्म जैसी घटनाएं लोगों के लिए आम हो गई हैं। खबर पढ़ने वाले जब अखबार खोलते हैं तो ऐसी ही अनेकों घटनाएं उसपर छपी होती हैं। समाज और यहां के लोगों के लिए ये घटनाएं बेशक दो सेकंड के मौन जैसी हों लेकिन जिन लड़कियों और महिलाओं के साथ ये होता है, उनके लिए जीवनभर के मौन के समान होती हैं।
वह अगर दोबारा खड़े होकर जीवन में आगे बढ़ने का सोचें भी तो भी आगे नहीं बढ़ पातीं। तो ऐसे में एक सवाल ये भी उठता है कि जो समाज महिलाओं की सुरक्षा की वकालत करता है, वही समाज उसे सुरक्षा क्यों नहीं दे पाता? क्यों ये कोशिश करता है कि जिस महिला के साथ दुष्कर्म हुआ है, वह इस घटना को कभी भूले ही न?