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Pahalgam Attack: कश्मीर में चुनौती बने हैं 76 आतंकी, इनमें अफगानिस्तान फ्रंट पर ट्रेंड 55 पाकिस्तानी; 21 लोकल

सार

सूत्रों का कहना है कि भले ही सीमा पर कोई बड़ी घुसपैठ नहीं हुई है, लेकिन इसके बावजूद पाकिस्तान की तरफ से बॉर्डर क्रॉस कर आतंकी, जेएंडके में पहुंचे हैं। सुरक्षा बलों द्वारा बॉर्डर पर घुसपैठ के कई प्रयास असफल किए गए हैं।
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पहलगाम में आतंकी हमला - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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जम्मू-कश्मीर के विभिन्न हिस्सों में लगभग 76 आतंकी छिपे हैं। इनमें से अधिकांश दहशतगर्दों की ट्रेनिंग 'अफगानिस्तान' फ्रंट पर हुई है। इन सभी आतंकियों तक पहुंचाना, सुरक्षा बलों के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। पहलगाम हमले में भी दो विदेशी यानी पाकिस्तानी आतंकी बताए जा रहे हैं। जेएंडे के विभिन्न हिस्सों में सक्रिय दहशतगर्दों में से 55 पाकिस्तानी हैं तो 21 लोकल बताए जा रहे हैं। पिछले दो वर्षों के दौरान इन दहशतगर्दों ने सुरक्षा बलों को बड़ी चोट पहुंचाई है। आर्मी और जेकेपी के कई अफसर और जवान शहीद हो चुके हैं। विश्वस्त सूत्रों के अनुसार, जब तक ये आतंकी मौजूद हैं, तब तक घाटी से आतंकी हमलों को खत्म कर पाना मुश्किल है। इन आतंकियों को भरपूर लोकल स्पोर्ट मिल रही है। इसी के बल पर ये आतंकी, बड़े हमले को अंजाम देने में कामयाब हो जाते हैं। 
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ट्रेंड आतंकियों ने पहुंचाई बड़ी चोट 
बता दें कि गत वर्षों में जम्मू-कश्मीर के विभिन्न इलाकों में सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच कई बड़ी मुठभेड़ हुई हैं। राजौरी के बाजीमाल इलाके में सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच हुई मुठभेड़ में सेना के कैप्टन एमवी प्रांजल, कैप्टन शुभम और हवलदार माजिद सहित चार शहादत हुई थी। राजौरी मुठभेड़ में जो दो आतंकी मारे गए थे, उनमें से एक पाकिस्तानी आतंकी 'क्वारी' भी था। वह पाकिस्तान के आतंकी संगठन 'लश्कर ए तैयबा' का हाई रैंक टेरोरिस्ट था। उसे पाकिस्तान/अफगानिस्तान फ्रंट पर ट्रेंड किया गया था। गत दो वर्ष के दौरान, जेएंडके में जितनी भी बड़ी मुठभेड़ हुई हैं, उनमें ज्यादातर हाई रैंक वाले ट्रेंड आतंकी मारे गए हैं। सितंबर 2023 में अनंतनाग जिले के कोकेरनाग क्षेत्र में हुई मुठभेड़ में भारतीय सेना की राष्ट्रीय राइफल 'आरआर' के कमांडिंग अफसर (कर्नल) मनप्रीत सिंह, मेजर आशीष और जम्मू कश्मीर पुलिस के डीएसपी हुमायूं भट्ट शहीद हो गए थे। इस मुठभेड़ में दो अन्य जवानों ने भी शहादत दी। साल 2020 के बाद जम्मू-कश्मीर में यह पहली घटना थी, जिसमें सेना के कमांडिंग अफसर शहीद हुए थे। 

मुश्किल लोकेशन पर बैठे रहते हैं आतंकी 
सूत्रों का कहना है कि भले ही सीमा पर कोई बड़ी घुसपैठ नहीं हुई है, लेकिन इसके बावजूद पाकिस्तान की तरफ से बॉर्डर क्रॉस कर आतंकी, जेएंडके में पहुंचे हैं। सुरक्षा बलों द्वारा बॉर्डर पर घुसपैठ के कई प्रयास असफल किए गए हैं। नेपाल का मार्ग, आतंकियों के भारत में प्रवेश करने का एंट्री प्वाइंट तो नहीं बन रहा, ये बात सुरक्षा एजेंसियों के दिमाग में है। जेएंडके में मौजूदा समय में सत्तर से अधिक आतंकी सक्रिय बताए जाते हैं। 
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उनके पास सुरक्षा बलों की आवाजाही से लेकर कई दूसरे इनपुट तक मौजूद रहे हैं। कोकेरनाग क्षेत्र में छिपे दो आतंकियों तक पहुंचने में सुरक्षा बलों को लंबा वक्त लगा था। आतंकियों ने अपने छिपने के लिए ऐसी लोकेशन तैयार की थी, जहां तक सुरक्षा बलों का पहुंचना, आसान नहीं था। इस तरह की रणनीति लोकल आतंकी तैयार नहीं कर सकते।  

कई वर्षों से घाटी में छिपे हैं दहशतगर्द 
2014 के दौरान जेएंडके में 104 आतंकवादी मारे गए थे। 2015 में 97, 2016 में 140, 2017 में 210, 2018 में 257, 2019 में 157, 2020 में 221, 2021 में 180, 2022 में 187, 2023 में 76 और पिछले साल 75 आतंकवादी मारे गए थे। पाकिस्तान की इंटेलिजेंस एजेंसी आईएसआई, अपने गुर्गे आतंकी संगठनों की मदद से जम्मू कश्मीर में हाइब्रिड आतंकियों की भर्ती कर रही है। घाटी में हाल-फिलहाल में कोई बड़ी घुसपैठ नहीं हुई है। संभव है कि सभी विदेशी आतंकी कई वर्षों से घाटी में कहीं पर छिपे हों। सुरक्षा बलों की वहां तक पहुंच न हो सकी हो। जम्मू कश्मीर पुलिस, आईबी, आर्मी एवं अन्य एजेंसियां आतंकियों के ठिकाने तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं। इन आतंकियों को घाटी में किसी न किसी तरह की मदद तो मिल ही रही है, इससे कोई इनकार नहीं कर सकता। सीमा पार के आतंकी संगठन, पाकिस्तानी आतंकियों को बचाना चाहते हैं। वे ज्यादा से ज्यादा हाइब्रिड आतंकी तैयार कर रहे हैं। हाइब्रिड आतंकियों की मदद से ही टारगेट किलिंग की वारदात को अंजाम दिया जाता है। सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ की रणनीति, अफगानिस्तान के लड़ाकों की तर्ज पर ट्रेंड हुए टॉप कैडर आतंकियों द्वारा बनाई जाती है।  

आतंकियों को आसानी से ट्रैक नहीं कर सकते 
जम्मू कश्मीर में 'जी-20' की बैठक से कुछ दिन पहले आतंकियों ने भारतीय सेना के वाहन पर हमला किया था। उसमें पांच जवान शहीद हो गए थे। इसके बाद राजौरी के कंडी जंगलों में बनी गुफाओं में छिपे आतंकियों के साथ हुई मुठभेड़ में भी सेना के पांच जवानों ने शहादत दी। पहले आईईडी ब्लास्ट और फिर जवानों पर अंधाधुंध फायरिंग की गई। 'पीपुल्स एंटी-फासिस्ट फ्रंट' (पीएएफएफ) के प्रवक्ता तनवीर अहमद राथर ने इन हमलों की जिम्मेदारी ली थी। पीएएफएफ ने इन हमलों का एक वीडियो भी जारी किया था। उसमें कहा गया कि सुरक्षा बलों को वे यानी आतंकी जैसा चाहते हैं, वैसा ही करने के लिए मजबूर कर देते हैं। सुरक्षा बल, उनके ट्रैप में आ जाते हैं। सुरक्षा बलों से जुड़े एक अधिकारी बताते हैं, पाकिस्तान से आए आतंकी, जम्मू कश्मीर के जंगलों में छिपे हैं। वे सामान्य फोन से बातचीत नहीं करते। यही वजह है कि उन्हें आसानी से ट्रैक नहीं किया जा सकता। सुरक्षा बलों को ज्यादातर सूचनाएं मुखबिरों के माध्यम से ही मिलती हैं। हालांकि मुखबिरों की सूचना को क्रॉस चैक किया जाता है, लेकिन कई बार इंटेल इनपुट, पूरी तरह से स्पष्ट नहीं होता। उस स्थिति में जोखिम या नुकसान की संभावना बनी रहती है। 

आतंकियों की नई भर्ती पर कसी है नकेल 
जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों से जुड़े एक अधिकारी बताते हैं कि अब घाटी में नए आतंकी सामने नहीं आ रहे। उनकी भर्ती पर काफी हद तक नकेल कस चुकी है। अब वहां पर जो आतंकी मौजूद हैं, वही अपने स्लीपर सेल या हाईब्रिड टेरोरिस्ट की मदद से हमलों को अंजाम दे रहे हैं। पाकिस्तान के आतंकी पैड पर सत्तर से ज्यादा दहशतगर्द तैयार किए गए हैं। वे सब घुसपैठ की ताक में हैं। लोकल स्तर पर जेएंडके में जब कोई युवा गायब हो जाता है तो गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज की जाती है। जम्मू कश्मीर पुलिस, लापता हुए युवक का पता लगाने का प्रयास करती है। दो तीन सप्ताह बाद असल खेल शुरु होता है। एक तरफ गुमशुदा युवक के परिजन और पुलिस उसे खोज रही होती है और दूसरी ओर तभी उस युवक की तस्वीर सोशल मीडिया पर आ जाती है। तस्वीर में वह युवक किसी आतंकी संगठन के सदस्य के तौर पर हथियार लहराता हुआ नजर आता है। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों द्वारा उसे सक्रिय आतंकी मान लिया जाता है।

आतंकियों के जाल में यूं फंस रहे थे युवा 
सूत्रों के मुताबिक, आतंकी संगठनों को यह बात अच्छे से मालूम होती है कि पुलिस और परिजन, लापता युवक की खोजबीन में लगे हैं। घाटी में कई ऐसे उदाहरण मौजूद हैं, जिनमें कई युवा कुछ समय बाद ही हथियार छोड़कर दोबारा से मुख्यधारा में शामिल हो गए। आतंकी संगठन, गुमराह युवक का ब्रेनवॉश कर देते हैं। इसके बाद जब उन्हें लगता है कि वह युवक अभी भी पूरी तरह से आतंक की राह पर चलने को तैयार नहीं है और वह मुख्यधारा में लौटना चाहता है तो वे उस युवक का आतंकी संगठन के साथ फोटो वायरल कर देते हैं। इसके बाद वह युवक अधर में फंस जाता है। हथियार के साथ जैसे ही उसका फोटो सार्वजनिक होता है तो पुलिस उसका नाम, सक्रिय आतंकियों की सूची में डाल देती है। ऐसे में वह युवक, चाह कर भी मुख्यधारा में वापसी नहीं कर पाता। 
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