फिल्म 'पद्मावती' को लेकर उठे विवाद पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने फिल्मकारों को कड़े निर्देश दिए हैं। गडकरी ने कहा कि अभिव्यक्ति के नाम पर इतिहास से छेड़छाड़ किया जाना ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि फिल्मकारों को सांस्कृतिक संवेदना का ध्यान रखा जाना चाहिए।
गडकरी ने एक न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में लोगों की ओर किए जा रहे विरोध पर किए गए सवाल पर गडकरी ने कहा कि ये उनका अधिकार है। वहीं करणी सेना के सदस्य संजय लीला भंसाली से पूछा कि उन्हें कौन से संविधान ने ये अधिकारी दिया है कि वो इतिहास के साथ खेल सकते हैं।
इस बीच फिल्म पद्मावती पर जारी संग्राम के बीच केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने इससे जुड़े विवाद के लिए फिल्म के निर्देशक और पटकथा लेखक को जिम्मेदार ठहराया है। पहली बार इस विवाद में कूदते हुए उमा ने जहां सेंसर बोर्ड को जनभावनाओं का कद्र करने की नसीहत दी।
पढ़ें: क्यों हुआ संजय लीला भंसाली पर हमला, कौन थीं पद्मावती, जानें
उमा ने ट्वीट के माध्यम से कहा कि सारे फसाद की जड़ फिल्म के निर्देशक और पटकथा लेखक हैं। इन्हें लोगों की भावनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक तथ्यों का भी ध्यान रखना चाहिए। एक अन्य ट्वीट में इस फिल्म को महिलाओं के सम्मान से जोड़ते हुए केंद्रीय मंत्री ने सेंसर बोर्ड को भी नसीहत दी।
उन्होंने कहा सेंसर बोर्ड एक स्वतंत्र संस्था है। हम सबकी अपेक्षा है कि फिल्म को रिलीज का प्रमाण पत्र देने से पहले वह बसकी भावनाओं का ख्याल रखे। उमा ने कहा कि खुद उन्हें भरोसा दिया गया है कि सेंसर बोर्ड इस मामले में सभी आपत्तियों का ध्यान रखेगा।
इस दौरान केंद्रीय मंत्री ने फिल्म के कलाकारों का समर्थन किया और उन्हें दी जा रही धमकियों को अनैतिक बताया। उन्होंने कहा कि कलाकारों के खिलाफ किसी भी तरह की टिप्प्णी अनुचित ही नहीं अनैतिक भी है।
गौरतलब है कि यह फिल्म रिलीज होने से पहले ही विवादों में घिर गई है। एक वर्ग विशेष फिल्म निर्देशक पर तथ्यों को तोड़मरोड़ कर पेश करने का आरोप लगा रहा है। इसी क्रम में एक संगठन ने इस फिल्म की अभिनेत्री दीपिका पादुकोण की नाक काटने और फिल्म निर्देशक के सिर पर 5 करोड़ का इनाम घोषित किया है।