जननी अम्मा बारे में कहा जाता था कि वे गर्भ में पल रहे बच्चे की नब्ज चेक कर सकती थीं। लोगों का मानना था कि वे पेट छूकर गर्भ में पल रहे बच्चे के स्वास्थ्य का हाल जान लेती थीं। अम्मा बताती थीं कि उन्हें प्रसव कराने की विधा अपनी दादी से मिली थी, जो दाई का काम कर चुकी थीं।
नि:शुल्क करती थीं सेवा
कर्नाटक के टुमकुर जिले के कृष्णापुरा गांव की रहने वाली सुलागिट्टी नरसम्मा एक निरक्षर कृषि मजदूर थीं। लेकिन पिछड़े इलाकों में प्रसव सहायिका के तौर पर उन्होंने बिना किसी चिकित्सा सुविधा के नि:शुल्क ही यह काम किया। उन्होंने सभी प्रसव पारंपरिक तरीकों से कराए गए थे। उनके नि:स्वार्थ भाव को देखते हुए उन्हें जननी अम्मा कहा जाने लगा।