इस मंदिर में छह कमरे हैं- ए से लेकर एफ तक। इनमें से ई और एफ वॉल्ट को अक्सर खोला जाता है क्योंकि मंदिर के अनुष्ठानों के लिए इस्तेमाल होने वाले बर्तन वहीं रखे जाते हैं। सी और डी में सोने और चांदी के जेवर रखे जाते हैं जिन्हें किसी खास दिन पर इस्तेमाल किया जाता है।
बाकी बचे ए और बी. इस ए वॉल्ट को जब खोला गया तो पता चला कि इसमें लगभग 1 लाख करोड़ का खजाना है। इसी वॉल्ट में हिंदुओं में पूजे जाने वाले महाविष्णु की साढ़े तीन फीट की एक सोने की मूर्ति मिली थी, जो कीमती हीरों से जड़ी थी। एक 18 फुट लंबी सोने की चेन भी। हीरे, रूबी और कीमती पत्थरों के बोरे निकले।
अब बात आती है वॉल्ट बी की, माना जाता है कि इस अकेले कमरे में ही बाकी सब कमरों से ज्यादा खजाना है। लेकिन कितना वो किसी को नहीं पता क्योंकि ये अभी तक खोला नहीं जा सका है।
क्यों नहीं खुला आखिरी कमरा
त्रावणकोर शाही परिवार सदियों से इस मंदिर की देखरेख कर रहा है। उनका तर्क है कि इसे कभी नहीं खोला जाना चाहिए क्योंकि ऐसा करना विश्वास और परंपरा के खिलाफ होगा। इस मंदिर को लेकर लोगों में तरह-तरह की मान्यताएँ हैं, मिथक हैं. लोगों में मान्यता है कि इसे खोला गया तो बहुत बुरा होगा. सुप्रीम कोर्ट ने भी 2011 में कहा था कि फिलहाल वॉल्ट बी ना खोला जाए।
उस वक्त सुप्रीम कोर्ट ने एक पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज केएसपी राधाकृष्णन की अध्यक्षता में सेलेक्शन कमेटी बनाई थी। वरिष्ठ वकील गोपाल सुब्रमण्यम को कोर्ट की मदद के लिए नियुक्त किया गया। उन्होंने 577 पेज की एक रिपोर्ट भी कोर्ट में पेश की जिसमें मंदिर के प्रशासन पर भ्रष्टाचार के आरोप थे।
उनके सुझावों पर कोर्ट ने 2014 में सीएजी यानी नियंत्रण और महालेखा परीक्षक को मंदिर के खातों का स्पेशल ऑडिट करने के लिए रखा। लेकिन एक बार फिर इस मंदिर का अधिकार शाही परिवार के पास आ गया है।