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कब खुलेगा पद्मनाभस्वामी मंदिर के आखिरी दरवाजे का राज, एक दशक पहले निकला था लाखों-करोड़ों का खजाना

Tue, 14 Jul 2020 08:11 PM IST
Jeet Kumar बीबीसी हिंदी
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पद्मनाभस्वामी मंदिर
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केरल के पद्मनाभस्वामी मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है और त्रावणकोर के शाही परिवार को ही इसका ट्रस्टी बरकरार रखा है।
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सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक मंदिर मामलों के प्रबंधन के लिए एक प्रशासनिक समिति बनाई जाएगी। तब तक अस्थायी तौर पर कोर्ट की कमेटी और जिला न्यायाधीश उसकी देख-रेख करेंगे।

एक वेबसाइट के मुताबिक कोर्ट ने मंदिर के आखिरी कमरे यानी 'वॉल्ट बी' को खोले जाने को लेकर कुछ नहीं कहा है और इसके खोले या ना खोले जाने का फैसला प्रशासनिक समिति पर छोड़ दिया है।
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लगभग 10 साल पहले ये मंदिर अचानक सुर्खियों में आ गया था, जब पता चला कि इसके कमरों में एक लाख करोड़ रुपए से भी ज्यादा का खजाना है। लेकिन एक कमरा है जो आज तक नहीं खोला गया।

क्या है इस मंदिर की कहानी

ये मंदिर केरल की राजधानी तिरूवनंतपुरम में है और आजादी से पहले इस पर त्रावणकोर के राजा का अधिकार था। भारत की आजादी के बाद जब त्रावणकोर और कोचिन रियासतों को मिलाया गया तो दोनों के बीच मंदिर को लेकर समझौता हुआ।

उसके हिसाब से इस मंदिर के प्रशासन का अधिकार मिला त्रावणकोर के आखिरी शासक को, जिनका नाम था चिथिरा थिरूनल। जब 1991 में उनकी मृत्यु हुई तो उनके भाई उत्तरादम वर्मा को इसकी कस्टडी मिली। साल 2007 में उन्होंने दावा किया कि इस मंदिर का खजाना उनके शाही परिवार की संपत्ति है।

इसके खिलाफ कई लोगों ने कोर्ट में मामला दायर किया एक निचली अदालत ने मंदिर के कमरों को खोलने पर रोक लगा दी थी। लेकिन फिर 2011 में केरल हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया कि वो इस मंदिर के नियंत्रण के लिए एक ट्रस्ट बनाए।

उसी साल शाही परिवार इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और कोर्ट ने इस फैसले पर स्टे लगा दिया और कहा कि इस मंदिर के कमरों में जो मिलता है उसकी लिस्ट बनाई जाए। तब इस मंदिर के कमरों को खोलने का सिलसिला शुरू हुआ।
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मंदिर में आखिर है क्या

इस मंदिर में छह कमरे हैं- ए से लेकर एफ तक। इनमें से ई और एफ वॉल्ट को अक्सर खोला जाता है क्योंकि मंदिर के अनुष्ठानों के लिए इस्तेमाल होने वाले बर्तन वहीं रखे जाते हैं। सी और डी में सोने और चांदी के जेवर रखे जाते हैं जिन्हें किसी खास दिन पर इस्तेमाल किया जाता है।

बाकी बचे ए और बी. इस ए वॉल्ट को जब खोला गया तो पता चला कि इसमें लगभग 1 लाख करोड़ का खजाना है। इसी वॉल्ट में हिंदुओं में पूजे जाने वाले महाविष्णु की साढ़े तीन फीट की एक सोने की मूर्ति मिली थी, जो कीमती हीरों से जड़ी थी। एक 18 फुट लंबी सोने की चेन भी। हीरे, रूबी और कीमती पत्थरों के बोरे निकले।

अब बात आती है वॉल्ट बी की, माना जाता है कि इस अकेले कमरे में ही बाकी सब कमरों से ज्यादा खजाना है। लेकिन कितना वो किसी को नहीं पता क्योंकि ये अभी तक खोला नहीं जा सका है।

क्यों नहीं खुला आखिरी कमरा
त्रावणकोर शाही परिवार सदियों से इस मंदिर की देखरेख कर रहा है। उनका तर्क है कि इसे कभी नहीं खोला जाना चाहिए क्योंकि ऐसा करना विश्वास और परंपरा के खिलाफ होगा। इस मंदिर को लेकर लोगों में तरह-तरह की मान्यताएँ हैं, मिथक हैं. लोगों में मान्यता है कि इसे खोला गया तो बहुत बुरा होगा. सुप्रीम कोर्ट ने भी 2011 में कहा था कि फिलहाल वॉल्ट बी ना खोला जाए।

उस वक्त सुप्रीम कोर्ट ने एक पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज केएसपी राधाकृष्णन की अध्यक्षता में सेलेक्शन कमेटी बनाई थी। वरिष्ठ वकील गोपाल सुब्रमण्यम को कोर्ट की मदद के लिए नियुक्त किया गया। उन्होंने 577 पेज की एक रिपोर्ट भी कोर्ट में पेश की जिसमें मंदिर के प्रशासन पर भ्रष्टाचार के आरोप थे।

उनके सुझावों पर कोर्ट ने 2014 में सीएजी यानी नियंत्रण और महालेखा परीक्षक को मंदिर के खातों का स्पेशल ऑडिट करने के लिए रखा। लेकिन एक बार फिर इस मंदिर का अधिकार शाही परिवार के पास आ गया है।
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