74वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर पद्म पुरस्कारों का एलान किया गया। 2023 के लिए राष्ट्रपति ने कुल 106 पद्म पुरस्कारों को प्रदान करने की मंजूरी दी है। सूची में 6 पद्म विभूषण, 9 पद्म भूषण और 91 पद्म श्री शामिल हैं। इस बार कई ऐसे 'गुमनाम हीरो' को पद्म पुरस्कार देने की घोषणा की गई, जिनको बहुत कम ही लोग जानते होंगे। पद्म पुरस्कार पाने वाले इन 'गुमनाम हीरो' के बारे में जानते हैं कि ये कैसे इन्होंने अपने कार्यों से कैसे यह उपलब्धि हासिल की।
अजय कुमार मंडावी को कला के क्षेत्र में पद्मश्री
अजय कुमार मंडावी
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छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के रहने वाले गोंड ट्राइबल वुड कार्वर अजय कुमार मंडावी को कला (लकड़ी पर नक्काशी) के क्षेत्र में पद्मश्री से नवाजा जाएगा। अजय कुमार मंडावी का पूरा परिवार कला से जुड़ा है। कला उन्हें विरासत में मिली। मंडावी vs अपनी कला के जरिए नक्सली विचारधारा वाले लोगों के विचारों में परिवर्तन लाने की कोशिश की है। उन्होंने कांकेर में के करीब 200 बंदियों को काष्ठ शिल्प में पारंगत किया है, जो पहले नक्सली थे। मंडावी ने कई धार्मिक ग्रंथों को भी काष्ठ पर जीवंत किया है। छत्तीसगढ़ सरकार ने वर्ष 2006 में उन्हें राज्य पुरस्कार से सम्मानित किया था।
मिजो लोक गायक केसी रुनरेमसंगी को पद्मश्री
केसी रुनरेमसंगी
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तीन दशकों से अधिक समय से मिजो सांस्कृतिक विरासत की रक्षा करने वालीं आइजवाल की मिजो लोक गायक केसी रुनरेमसंगी को पद्मश्री से सम्मानित किया जाएगा। केसी रुनरेमसंगी ने संगीत का शुरुआती प्रशिक्षण दूसरों को सुन-सुन कर सीखा। बाद में उन्होंने इंस्टीट्यूट ऑफ म्यूजिक एंड फाइन ऑर्ट्स में संगीत में प्रशिक्षण लिया।
थमाटे प्रतिपादक मुनिवेंकटप्पा को कला के क्षेत्र में पद्मश्री
थमाटे प्रतिपादक मुनिवेंकटप्पा
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कर्नाटक के चिक्काबल्लापुर निवासी वयोवृद्ध थमाटे प्रतिपादक मुनिवेंकटप्पा को कला (लोक संगीत) के क्षेत्र में पद्मश्री से सम्मानित किया जाएगा। थमाटे पुराने मैसूर क्षेत्र में ड्रम बजाकर लोगों को लोक संगीत सुनाते हैं। यह संगीत वाद्ययंत्र पूरे राज्य में प्रचलित है। थमाटे 16 वर्ष की आयु से ही ड्रम बजाते आ रहे हैं और आज युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। वह युवाओं को इसका प्रशिक्षिण भी देते हैं।
102 वर्षीय सरिंदा वादक मंगला कांति रॉय को सम्मान
सरिंदा वादक मंगला कांति रॉय
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पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी के 102 वर्षीय सरिंदा वादक मंगला कांति रॉय को कला (लोक संगीत) के क्षेत्र में पद्मश्री से सम्मानित किया जाएगा। वह सरिंदा के जरिए पक्षियों की अनोखी आवाज निकालने के लिए प्रसिद्ध हैं। मंगला कांति रॉय पिछले आठ दशकों से प्रस्तुति के माध्यम से सरिंदा वाद्ययंत्र को बढ़ावा दे रहे हैं।
नाचा कलाकार डोमार सिंह कुंवर को पद्मश्री
डोमार सिंह कुंवर
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छत्तीसगढ़ी नाट्य नाचा कलाकार डोमार सिंह कुंवर को कला (नृत्य) के क्षेत्र में पद्मश्री से सम्मानित किया जाएगा। 75 वर्षीय कलाकार डोमार सिंह कुंवर बालोद जिले के रहने वाले हैं। वह पिछले पांच दशकों से नाचा की परंपरा को जीवित रखा है और छत्तीसगढ़ी नाट्य नाच के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया है। डोमार में 13 बोली या भाषाओं में नाटक करते हैं और देशभर में अपने नाटकों की 5,000 से अधिक प्रस्तुति दे चुके हैं। वह नाटकों के जरिए अंधविश्वास और बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों को लेकर लोगों को जागरूक करते हैं। डोमार ने 12 वर्ष की आयु में पहली बार मंच पर प्रस्तुति दी थी। तब से वह नाचा की प्रस्तुति दे रहे हैं।
परशुराम कोमाजी खुणे
परशुराम कोमाजी खुणे
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महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले के झाड़ीपत्ती रंगभूमि कलाकार परशुराम कोमाजी खुणे को कला (रंगमंच) के क्षेत्र में पद्मश्री से नवाजा जाएगा। परशुराम 5,000 से ज्यादा रंगमंच शो में प्रस्तुति दी है और 800 अलग-अलग रोल निभाए हैं। झाड़ीपत्ती लोक नाट्य है, महाराष्ट्र में धान की फसल की कटाई के दौरान इसका मंचन होता है। 70 वर्षीय परशुराम नक्सल प्रभावित इलाकों में भटके युवाओं को मुख्यधारा में लाने के लिए उन्हें लोक नृत्य से जोड़ते हैं और उनके पुनर्वास के लिए काम करते हैं। साथ ही वह शराब की लत और आंधविश्वास को खत्म करने जैसे सामाजिक मुद्दों को लेकर लोगों को जागरूक करते हैं।
कलमकारी आर्टिस्ट भानुभाई चितारा
भानुभाई चितारा
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गुजरात के चुनार समुदाय के कलमकारी आर्टिस्ट भानुभाई चितारा को 400 साल पुरानी माता नी पछेड़ी पारंपरिक शिल्प की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया जाएगा। चितारा को कला (पेंटिंग) के क्षेत्र में यह सम्मान मिला। वह देश दुनिया में 200 वर्कशॉप और प्रदर्शनी के जरिए इस पारंपरिक चित्रकारी को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
गुलाम मोहम्मद जाज को शिल्प के क्षेत्र में पद्मश्री
गुलाम मोहम्मद जाज
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जम्मू-कश्मीर के संतूर शिल्पकार गुलाम मोहम्मद जाज को कला (शिल्प) के क्षेत्र में पद्मश्री से नवाजा जाएगा। वह 200 वर्षों से कश्मीर में बेहतरीन संतूर बनाने वाले परिवार की 8वीं पीढ़ी हैं। 81 वर्षीय गुलाम मोहम्मद पिछले सात दशकों से संतूर शिल्पकारी करते हैं और परिवार के पेशे को जीवित रखे हुए हैं।
प्रसिद्ध चिकित्सक दिलीप महालनाबिस को मरणोपरांत पद्म विभूषण
प्रसिद्ध चिकित्सक दिलीप महालनाबिस
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पश्चिम बंगाल के प्रसिद्ध चिकित्सक दिलीप महालनाबिस को मरणोपरांत पद्म विभूषण के लिए चुना गया है। डॉ. महालनाबिस का पिछले वर्ष अक्तूबर में 87 वर्ष की आयु में निधन हो गया था। उन्हें ओरल रिहाइड्रेशन थेरेपी के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए जाना जाता है। वह 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के समय चर्चा में आए थे। जब बनगांव में बांग्लादेशी नागरिकों के शरणार्थी कैंप में हैजा की बीमारी फैल गई थी। तब डॉक्टर महालनाबिस ने ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन के जरिए हजारों लोगों की जान बचाई थी।
बिहार के कपिल देव प्रसाद को बुनकर कला के क्षेत्र में पद्मश्री
कपिल देव प्रसाद
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बिहार के नालंदा जिले के रहने वाले कपिल देव प्रसाद को बावन बूटी के लिए पद्मश्री मिला है। उन्होंने अपने परिवार से सीखे हुनर को लोगों में बांटकर रोजगार का एक माध्यम विकसित कर दिया। बावन बूटी एक तरह की बुनकर कला है। सूती या तसर के कपड़े पर हाथ से एक जैसी 52 बूटियां यानी मौटिफ टांके जाने के कारण इसे बावन बूटी कहा जाता है। बूटियों में बौद्ध धर्म-संस्कृति के प्रतीक चिह्नों की बहुत बारीक कारीगरी होती है। बावन बूटी की साड़ियां सबसे ज्यादा डिमांड में रहती हैं, वैसे इस कला से पूर्व परिचित लोग बावन बूटी चादर और पर्दे भी खोजते हैं।