लीक हुए पनामा दस्तावेजों की जांच के लिए विभिन्न एजेंसियों की टीम गठिक करने के सरकार के निर्णय पर सवाल उठाते हुए जदयू के प्रमुख शरद यादव ने मंगलवार को कहा कि खाताधारकों की सूची में पद्म पुरस्कार विजेताओं के नाम होना शर्मनाक बात है।
उन्होंने कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एसआईटी पहले से ही कालेधन की जांच कर रही है। लीक हुए पनामा दस्तावेज इसकी जांच का हिस्सा होना चाहिए। यह शर्मनाक बात है कि ऐसे खाता खुलवाने वालों में पद्म पुरस्कार विजेताओं के नाम शामिल हैं।’
उन्होंने उदारीकरण के नाम पर कॉरपोरेट घरानों द्वारा देश को लूटने पर हमला बोलते हुए कहा कि 1990 में इन कंपनियों की औसत कमाई दो करोड़ रुपये थी जो 25 साल में बढ़ कर दो लाख करोड़ रुपये से भी अधिक हो गई है।
यादव ने एक बयान में कहा, ‘क्या किसी सरकार ने कभी इस बात की जांच और सत्यापन किया है कि क्यों कुछ खास समूह इतने धनवान हो गए? एक आम आदमी भी इतना समझ सकता है कि सरकार की मिलीभगत के बिना वे इतने धनी नहीं हो सकते।
पनामा रिपोर्ट ने उजागर किया है कि टैक्स हैवन में गुप्त कंपनियां रखने वालों की वैश्विक सूची में भारतीय भी शामिल हैं। मेरे ख्याल से यह हमारे देश में हुई अंध उदारीकरण का परिणाम है जिसका फायदा बड़े लोगों ने अवैध पैसों को विदेश में संचित कर उठाया है।’