कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) में श्रीलंका पर प्रस्ताव के दौरान भारत के अनुपस्थित रहने को तमिल लोगों के साथ विश्वासघात बताया है। चिदंबरम ने इस मुद्दे पर विदेश मंत्री एस जयशंकर के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि लोगों को तमिलनाडु चुनाव में अन्नाद्रमुक-भाजपा गठबंधन को सबक सिखाना चाहिए।
पूर्व वित्तमंत्री ने कहा, तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में भाजपा-अन्नाद्रमुक को दंडित करे जनता
पूर्व वित्तमंत्री ने मंगलवार को ट्वीट किया, यूएनएचआरसी में श्रीलंका पर आए प्रस्ताव के दौरान भारत अनुपस्थित रहा। यह तमिल लोगों की भावना के साथ घोर विश्वासघात है। इसके लिए तमिलनाडु की जनता को अन्नाद्रमुक और भाजपा को दंडित करना चाहिए। अगर विदेश मंत्री को भारतीय प्रतिनिधि को अनुपस्थित रहने के लिए मजबूर किया गया तो उन्हें इसके विरोध में तत्काल इस्तीफा देना चाहिए।
यूएनएचआरसी ने श्रीलंका के मानवाधिकार रिकॉर्ड के खिलाफ प्रस्ताव को अपनाया था, जो संयुक्त राष्ट्र को लिट्टे के खिलाफ 2008-09 के बीच गृहयुद्ध के दौरान सुबूत इकट्ठा करने की इजाजत देता है। भारत इस प्रस्ताव पर वोटिंग के दौरान अनुपस्थित रहा था। हालांकि भारत ने श्रीलंका से आग्रह किया है कि वह वहां जारी सुलह प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और तमिल समुदाय की आकांक्षाओं के समाधान के लिए अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करे।
श्रीलंकाई तमिलों को धोखा दिया: वाइको
वहीं, एमडीएमके के महासचिव वाइको ने कहा, प्रस्ताव पर अनुपस्थित रहकर भारत सरकार ने श्रीलंकाई तमिलों के साथ धोखा किया है। सिर्फ तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को देखते हुए भारत ने वोटिंग से वॉकाउट किया, अन्यथा वह श्रीलंका के समर्थन में वोट करता। भारत सरकार ने जो किया, मैं उसका निंदा करता हूं। श्रीलंका में जो हुआ वह गृह युद्ध नहीं, बल्कि नरसंहार था। 1.37 लाख तमिलों की हत्या की गई। अंतरराष्ट्रीय समुदाय तमिलों की परेशानी को दूर करने में नाकाम रहा है।