चीफ जस्टिस केएम जोसेफ की खंडपीठ ने 21 मार्च 2016 को उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाने के फैसले को पलट दिया था। इसकी वजह से हरीश रावत एक बार फिर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बन गए थे। जस्टिस जोसेफ और जस्टिस वीके बिष्ट की बेंच ने अपने फैसले में कहा था, 'केंद्र की ओर से राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाना सुप्रीम कोर्ट की ओर से निर्धारित नियम के खिलाफ है।'
जस्टिस जोसेफ के प्रमोशन न किए जाने के बारे में विशेषज्ञों का मानना है कि उनके नाम की सिफारिश पर सरकार को लग रहा है कि कोलेजियम ने वरिष्ठता और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को नजरअंदाज किया है। जस्टिस जोसेफ हाईकोर्ट के 669 जजों की वरिष्ठता सूची में 42वें नंबर पर हैं।