कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम (फाइल फोटो)
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की घोषणाओं और योजनाओं पर तंज कसते हुए पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने कहा कि खोदा पहाड़ निकली चुहिया। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन में जिन लोगों का रोजगार छिना है, उनके लिए सरकार के पास न कोई रणनीति है और न ही वित्त मंत्री ने उससे निपटने की कोई योजना और पैकेज की घोषणा की।
पूर्व वित्त मंत्री चिदंबरम ने त्योहारी सीजन में सरकारी कर्मचारियों को 10 हजार रुपये एडवांस देने की घोषणा पर कहा, ये सरकार अब माता पिता की भूमिका निभाना चाहती है। जैसे भाजपा कहती है कि क्या खाएं, क्या पहनें और किससे शादी करें। वैसे ही सरकारी कर्मचारियों को बताया जा रहा है क्या करें, क्या न करें। 10 हजार रुपये उन्हें अलग से नहीं मिल रहे, इसे उन्हें लोन की ईएमआई की तरह लौटाने होंगे।
उन्होंने कहा सरकार ने 2020-21 के बजट में राज्यों के लिए 9 लाख करोड़ का प्रावधान किया है। जबकि सारे राज्यों को मिलाकर 7,500 करोड़ दिए जा रहे हैं, जो बहुत कम है। सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों को एलटीसी पर जाने के दौरान हुए खर्च में टैक्स में छूट की बात कही है। जिसे चिदंबरम ने सात शर्तों वाले सरकार के इस कदम को तुच्छ ठहराया।
उन्होंने कहा, ये छूट तभी मिलेगी जब वे निर्धारित राशि से दुगना खर्च करेंगे, डिजिटल भुगतान करेंगे, जीएसटी बिल देंगे और 31 मार्च 2021 से पहले बिल जमा करेंगे। उन्हीं आइटमों फर छूट मिलेगी, जिन पर 12 प्रतिशत जीएसटी हो। इसमें खाने पीने के आइटम शामिल नहीं हैं।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने तंज कसा कि देखते हैं कि वित्त मंत्री के इस उदार गिफ्ट का कितने कर्मचारी इसका लाभ उठाते हैं। एलटीसी की स्कीम के दुष्परिणाम पर उन्होंने कहा कि अगले 2-3 सालों में हमें कैग की रिपोर्ट का इंतजार करना चाहिए। कोरोना और लॉकडाउन के दौरान प्रभावित गरीबों को सीधी रकम देने की मांग पर सरकार के पास देने को कुछ नहीं है।