कोरोना वायरस के तेजी से बढ़ते नए मामलों के चलते अगले कुछ महीने भारत के लिए नाजुक है। इससे अपरिपक्व आर्थिक सुधारों के समक्ष चुनौती खड़ी हो रही है। यह कहना है कि अर्थव्यवस्था का वैश्विक आकलन करने वाली फर्म ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स का। फर्म ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय अनुभव के आधार पर देखा जाए तो भारत में टीकाकरण की रफ्तार काफी धीमी है और संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए यह पर्याप्त नहीं है।
ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स ने कहा, कोराना का असर काफी सीमित है और अर्थव्यवस्था जुझारू क्षमता दिखा रही है, लेकिन नीति-निर्माताओं के समक्ष अब जरा भी कोताही की गुंजाइश नहीं बची है।
राज्य सरकारें इस बार सख्त लॉकडाउन से बच रही हैं। ऐसे में इस बार इसका आर्थिक प्रभाव पिछले साल की दूसरी तिमाही की तुलना में कम रहेगा। यदि स्वास्थ्य की स्थिति उल्लेखनीय रूप से खराब होती है और व्यापक रूप से सख्त अंकुश लगाए जाते हैं, तो 2021 की पहली छमाही के लिए हमारा अनुमान प्रभावित हो सकता है।
बीते मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष ने 2021 में भारत की प्रभावी विकास दर 12.5 फीसदी रहने की उम्मीद जताई थी।
2020 की तरह भारतीय अर्थव्यवस्था में बड़ी गिरावट नहीं
वैश्विक पूर्वानुमान कंपनी ने कहा कि दूसरी लहर अधिक व्यापक हो रही है, जिससे आगामी दिनों में आवाजाही का स्तर प्रभावित होगा। हालांकि, हम उम्मीद करते हैं कि इस बार भारतीय अर्थव्यवस्था में 2020 की तरह बड़ी नाटकीय गिरावट नहीं आएगी। अभी लक्षित लॉकडाउन के जरिये महामारी को फैलने से रोकने की रणनीति अपनाई जा रही है।
जिन देशों ने लॉकडाउन नहीं लगाया, उनका प्रदर्शन बिगड़ा
ऑक्सफोर्ड इकनॉमिक्स ने कहा कि यह सही है कि पिछले साल संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए जिन देशों ने लॉकडाउन नहीं लगाया था, उनका प्रदर्शन अंकुश लगाने वाले देशों की तुलना में आर्थिक रूप से अच्छा नहीं रहा था।