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Report: क्या जलवायु संकट के लिए सिर्फ गरीब जिम्मेदार? 10 दिन में अमीरों ने खत्म कर दिया 2026 का कार्बन कोटा

Tue, 13 Jan 2026 07:38 AM IST
हिमांशु चंदेल अमर उजाला नेटवर्क

सार

ऑक्सफैम की रिपोर्ट के अनुसार 2026 शुरू होने के सिर्फ 10 दिनों में दुनिया के सबसे अमीर एक फीसदी लोगों ने अपना पूरा कार्बन कोटा खत्म कर दिया। सबसे अमीर 0.1 फीसदी ने तो 3 जनवरी तक ही सीमा पार कर ली। आइए जानते हैं कि रिपोर्ट में और क्या-क्या खुलासे हुए हैं।

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जलवायु संकट का कौन जिम्मेदार। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दुनिया में जलवायु संकट को लेकर बहस के बीच ऑक्सफैम की नई रिपोर्ट ने चौंकाने वाले तथ्य सामने रखे हैं। रिपोर्ट के अनुसार साल 2026 शुरू होने के महज 10 दिनों के भीतर ही दुनिया के सबसे अमीर एक फीसदी लोगों ने पूरे साल के लिए तय अपना कार्बन कोटा खत्म कर दिया। इसका मतलब है कि वर्ष की शुरुआत में ही अमीर वर्ग ने धरती पर उतना दबाव डाल दिया, जितना गरीब आबादी पूरे साल में भी नहीं डाल पाती।

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ऑक्सफैम के मुताबिक कार्बन बजट वह अधिकतम सीमा है, जिसके भीतर रहकर कार्बन उत्सर्जन किया जाए तो वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखा जा सकता है। लेकिन रिपोर्ट बताती है कि 2026 की शुरुआत होते ही इस सीमा का सबसे ज्यादा उल्लंघन अमीर वर्ग ने किया। इससे यह साफ होता है कि जलवायु संकट की जिम्मेदारी समान रूप से नहीं बंटी है।

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सबसे अमीर 0.1 फीसदी ने कब पार की सीमा?
रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनिया के सबसे अमीर 0.1 फीसदी लोगों ने तो 3 जनवरी तक ही अपना पूरा कार्बन बजट खत्म कर दिया। ऑक्सफैम ने इस दिन को ‘पॉल्यूटोक्रैट डे’ नाम दिया है। इसका अर्थ है वह दिन, जब अत्यधिक संपन्न लोगों का प्रदूषण पूरी दुनिया के भविष्य को खतरे में डाल देता है। यह नाम जलवायु असमानता की गंभीरता को उजागर करता है।

आंकड़े क्या कहते हैं?

  • सबसे अमीर 0.1 फीसदी लोग एक दिन में उतना कार्बन फैलाते हैं, जितना दुनिया की आधी गरीब आबादी पूरे साल में करती है।
  • एक अमीर व्यक्ति रोजाना औसतन 800 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जित करता है।
  • इसके मुकाबले एक गरीब व्यक्ति का दैनिक उत्सर्जन करीब दो किलोग्राम सीओ-2 होता है।
  • एक औसत अरबपति अपने निवेशों के जरिए हर साल लगभग 19 लाख टन कार्बन उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार होता है।


लग्जरी जीवनशैली और निवेश कैसे बढ़ा रहे संकट?
ऑक्सफैम की रिपोर्ट ‘क्लाइमेट प्लंडर: हाउ अ पावरफुल फ्यू आर लॉकिंग द वर्ल्ड इंटू डिजास्टर’ बताती है कि सुपर-रिच सिर्फ अपनी लग्जरी जीवनशैली से ही नहीं, बल्कि बड़े उद्योगों और कंपनियों में किए गए निवेशों के जरिये भी भारी कार्बन उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार हैं। निजी जेट, बार-बार हवाई यात्रा, बड़ी गाड़ियां, एयर-कंडीशन्ड घर और ज्यादा बिजली खपत अमीरों के कार्बन फुटप्रिंट को कई गुना बढ़ा देती है।

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गरीबों पर क्यों पड़ रहा सबसे ज्यादा असर?
रिपोर्ट के अनुसार गरीब और कमजोर समुदाय जलवायु संकट के लिए सबसे कम जिम्मेदार हैं, लेकिन इसका सबसे ज्यादा खामियाजा वही भुगत रहे हैं। सीमित संसाधन, न्यूनतम ऊर्जा खपत और साधारण जीवनशैली के बावजूद जलवायु परिवर्तन से होने वाली बाढ़, सूखा और गर्मी का असर इन्हीं समुदायों पर ज्यादा पड़ता है। ऑक्सफैम का कहना है कि जब तक अमीरों के अत्यधिक प्रदूषण पर सख्त लगाम नहीं लगेगी, तब तक जलवायु न्याय संभव नहीं है।

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