AIMIM: चीन के विदेश मंत्री की भारत यात्रा के बाद असदुद्दीन ओवैसी ने मोदी सरकार की चीन नीति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सीमा विवाद अब भी सुलझा नहीं है। उन्होंने सरकार से चीन के साथ व्यापार घाटा, नदियों का डाटा साझा न करने और पाकिस्तान को समर्थन देने जैसे मुद्दों पर जवाब मांगा।
चीन के विदेश मंत्री वांग यी के भारत दौरे के बाद एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने गुरुवार को केंद्र सरकार की चीन नीति को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि क्या भारत-चीन सीमा पर हालात 2020 में गलवां घाटी में हुई झड़प से पहले जैसी स्थिति में लौट आए हैं?
नदियों से जुड़ा रियल-टाइम डाटा नहीं देता चीन
ओवैसी ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार की चीन नीति कई बार बदली है और इससे पिछले 11 वर्षों में भारत की स्थिति कमजोर हो गई है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए कहा कि अगर अप्रैल 2020 से पहले जैसी स्थिति बहाल नहीं हुई है, तो फिर चीन से इतनी 'गहरी दोस्ती' कैसे निभाई जा रही है? उन्होंने सवाल किया कि चीन ने अब तक भारत के साथ उन नदियों से जुड़ा रियल-टाइम डाटा साझा करने से क्यों इनकार किया है, जिन पर वह पनबिजली परियोजनाएं चला रहा है। चीन केवल आपात स्थिति या मानवीय आधार पर ही ये जानकारी देता है।
विज्ञापन
व्यापार घाटा कम करने के चीन क्या वादा किया?
हैदारबाद सांसद ने यह भी पूछा कि क्या चीन ने पाकिस्तान को सैन्य सहायता न देने का कोई वादा किया है? और क्या भारत सरकार ने चीन को यह स्पष्ट रूप से कहा है कि जब तक वह पाकिस्तान के जरिए भारत को नुकसान पहुंचाना बंद नहीं करता, तब तक दोनों देश अच्छे दोस्त नहीं बन सकते? उन्होंने यह भी पूछा कि चीन अब तक भारत को डीएपी खाद, दुर्लभ खनिज (रेयर अर्थ मेटल्स) और बोरिंग मशीनों की आपूर्ति पर आधिकारिक सहमति क्यों नहीं दे रहा? इसके अलावा, भारत के खिलाफ जो बड़ा व्यापार घाटा है, उसे कम करने के लिए चीन ने क्या वादे किए हैं?
'सरकार के पास सवालों के जवाब नहीं'
उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि क्या हम अब और ज्यादा द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाकर इस व्यापार घाटे को और बड़ा करने वाले हैं? ओवैसी ने दावा किया कि भारत ने क्षेत्रीय सीमा से लेकर व्यापार तक, हर स्तर पर नुकसान उठाया है और सरकार के पास इन सवालों का कोई स्पष्ट जवाब नहीं है। इससे उसकी विफलता सामने आती है। इससे पहले इस हफ्ते भारत और चीन ने 19 अगस्त को अपने संबंधों में सुधार के संकेत देते हुए कुछ अहम कदमों की घोषणा की थी। इसमें सीमा पर शांति बनाए रखने, जमीनी सीमा से फिर से व्यापार शुरू करने, निवेश बढ़ाने और सीधी उड़ान सेवा बहाल करने जैसे फैसले शामिल थे।