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सुरक्षा पर संकट: 50 हजार से ज्यादा ड्रोन बिना जांच-रजिस्ट्रेशन के एक्टिव, जानें किस काम में हो रहा है इस्तेमाल

Thu, 03 Sep 2026 06:50 PM IST
राहुल कुमार डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

ड्रोन फेडरेशन इंडिया के मुताबिक ने टाइप सर्टिफिकेशन में कलपुर्जों के मूल देश की गलत जानकारी देने वालों पर सख्त कार्रवाई और उनकी अर्जी खारिज करने की मांग की है। ड्रोन में कम से कम 50 प्रतिशत भारतीय सामान अनिवार्य करने और इसे हर साल 5-7 प्रतिशत बढ़ाने का सुझाव दिया है।
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ड्रोन - फोटो : ANI
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विस्तार
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देश के बाजार में इस वक्त 50 हजार से ज्यादा ऐसे ड्रोन बेचे जा रहे हैं, जो बिना इजाजत और गैर कानूनी तरीके से भारत लाए गए हैं। इनमें से ज्यादातर ड्रोन का उपयोग फोटो-वीडियो खींचने और खेतों में कीटनाशक छिड़कने के काम आ रहे हैं। इससे नियमों का पालन करने वाली भारतीय कंपनियों को नुकसान हो रहा है। ड्रोन इंडस्ट्री ने भी सरकार से ऐसे ड्रोन पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

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वहीं, बाजार में बिक रहे कई खेती वाले ड्रोन की न तो कोई जांच हुई है। न ही रजिस्ट्रेशन। इनमें से कुछ ड्रोन दस किलो से भारी वजन उठाकर उड़ रहे हैं फिर भी इन पर ऊंचाई और सीमा से जुड़े कोई नियम लागू नहीं हैं। ड्रोन फेडरेशन इंडिया के मुताबिक, इन्हें अवैध तरीके से लाने के लिए कई तरीके अपनाए जा रहे हैं। गलत जानकारी देकर सामान मंगाया जाता है। ड्रोन के पार्ट्स अलग-अलग खेप में लाकर देश में ही जोड़े जाते हैं। कुछ व्यावसायिक ड्रोन को खिलौना बताकर कस्टम से निकाला जा रहा है, ताकि सख्त नियमों से बचा जा सके।

ई-कॉमर्स वेबसाइट पर धड़ल्ले से हो रही ब्रिकी
गैर-कानूनी ड्रोन सिर्फ स्थानीय बाजारों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ई-कॉमर्स वेबसाइटों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए भी धड़ल्ले से बेचे जा रहे हैं। फेडरेशन के मुताबिक, देश में कानून या नियमों की कमी नहीं है। असली समस्या मौजूदा नियमों को सख्ती से लागू नहीं करने की है। फेडरेशन ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय को पत्र भेजकर इस मुद्दे को उठाया है। उन्होंने लिखा, नियमों का पालन नहीं करने वाले ड्रोन से भारतीय निर्माताओं को नुकसान हो रहा है। इससे सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा को भी खतरा बढ़ रहा है। डीएफआई ने इसे रोकने के लिए राजस्व खुफिया निदेशालय और नागर विमानन महानिदेशालय की संयुक्त कार्रवाई का सुझाव दिया है। स्थानीय पुलिस और अन्य एजेंसियों की मदद से बड़े विक्रेताओं की पहचान कर ड्रोन जब्त करने और जुर्माना लगाने की मांग की गई है। ऐसी कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक करने का भी सुझाव दिया गया है, ताकि दूसरे विक्रेताओं पर भी रोक लग सके।
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फेडरेशन ने टाइप सर्टिफिकेशन में कलपुर्जों के मूल देश की गलत जानकारी देने वालों पर सख्त कार्रवाई और उनकी अर्जी खारिज करने की मांग की है। ड्रोन में कम से कम 50 प्रतिशत भारतीय सामान अनिवार्य करने और इसे हर साल 5-7 प्रतिशत बढ़ाने का सुझाव दिया है। एयरफ्रेम और लैंडिंग गियर के आयात पर रोक लगाने की मांग है। बैटरी, मोटर, प्रोपेलर और नेविगेशन जैसे जरूरी पार्ट्स पर आयात शुल्क 50 प्रतिशत बढ़ाने का भी प्रस्ताव है। कमर्शियल ड्रोन को खिलौना बताकर कस्टम छूट लेने की व्यवस्था खत्म करने की मांग की गई है। फेडरेशन के मुताबिक, इससे घरेलू उत्पादन बढ़ेगा, भारतीय कंपनियों को बराबरी का मौका मिलेगा और सुरक्षा मजबूत होगी।

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