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African Swine Fever: असम में नहीं थम रहा अफ्रीकन स्वाइन फीवर का कहर, 2020 से अब तक चालीस हजार से ज्यादा सुअरों की मौत

Tue, 19 Jul 2022 07:31 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी

सार

जनवरी 2022 से अब तक लगभग 900 सुअरों की मौत इस साल भीषण बाढ़ के कारण हुई है। बोरा ने अफ्रीकी स्वाइन फीवर को लेकर कहा कि यह एक घातक बीमारी है। वर्तमान में असम के 72 जिले एएसएफ से प्रभावित हैं।
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अफ्रीकन स्वाइन फीवर का कहर। - फोटो : Pixabay
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विस्तार
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2020 में कोरोना की शुरुआत के बाद से उत्तर पूर्व राज्यों के कई इलाकों में अफ्रीकी स्वाइन फीवर के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। इससे सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य असम है। 2020 की शुरुआत में राज्य में अफ्रीकी स्वाइन फीवर के मामले सामने आए थे, जिसके बाद से अब तक राज्य में 40 हजार से ज्यादा सुअरों की मौत इसके कारण हुई है। राज्य के पशुपालन और पशु चिकित्सा मंत्री अतुल बोरा ने मंगलवार को इसकी जानकारी दी।  

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उन्होंने एक पत्रकार वार्ता के दौरान कहा कि इतनें सुअरों की मौत से 14,000 से अधिक परिवार आर्थिक रूप से प्रभावित हुए हैं। मंत्री ने कहा कि जनवरी 2022 से अब तक लगभग 900 सुअरों की मौत इस साल भीषण बाढ़ के कारण हुई है। बोरा ने अफ्रीकी स्वाइन फीवर को लेकर कहा कि यह एक घातक बीमारी है। वर्तमान में असम के 72 जिले एएसएफ से प्रभावित हैं। उन्होंने बताया कि उत्तर-पूर्वी राज्य में बीमारी के प्रसार को रोकने के लिए 27 उपकेंद्रों में फैले 1,378 सूअरों को सरकार के आदेश पर मार दिए गए हैं। 

इससे पहले सितंबर 2020 में, असम के पूर्व मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने एएसएफ प्रभावित क्षेत्रों में लगभग 12,000 सूअरों को मारने का आदेश दिया था। इसके बदले में उनके मालिकों को पर्याप्त मुआवजा दिया गया था। मंत्री ने कहा कि हमने प्रभावित परिवारों के लिए एक मुआवजा योजना भी शुरू की है। सरकार ने अब तक 1.48 करोड़ रुपये उन किसानों को मुआवजा देने के लिए खर्च किए हैं जिनके सुअर मार दिए गए हैं। 
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बोरा ने कहा कि केंद्रीय नियमों के अनुसार केवल एएसएफ प्रभावित सूअरों को मारने के आधार पर मुआवजे का भुगतान करने का प्रावधान है। उन्होंने यह भी बताया कि एएसएफ को एक विशेष स्थान पर फैलाने के बाद तीन दिनों के भीतर सूअरों को मार दिया जाता है और 10 दिनों के भीतर किसान को मुआवजा दिया जाता है। उन्होंने बताया कि स्थिति पर नजर रखने और पर्याप्त उपाय करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है। 

उन्होंने कहा कि सरकार ने 427 रैपिड रिस्पांस टीमों का गठन किया है और एएसएफ के प्रसार के खिलाफ सुअर किसानों को जागरूक करने के लिए एक व्यापक जागरूकता अभियान शुरू किया है। 
मंत्री ने यह भी कहा कि सुअर पालन क्षेत्र को पुनर्जीवित करने के लिए, अंतर्राष्ट्रीय पशुधन अनुसंधान संस्थान (ILRI), खाद्य और कृषि संगठन (FAO) और ऑफिस इंटरनेशनल डेस एपिज़ूटीज़ (OIE) के सहयोग से कार्यक्रमों की एक श्रृंखला की योजना बनाई गई थी। इतना ही नहीं, शिवसागर जिले के नजीरा में 400 सूअरों को संसाधित करने की दैनिक क्षमता वाला एक सुअर प्रसंस्करण केंद्र तैयार किया गया था।हालांकि, क्षेत्र में एएसएफ के अचानक फैलने के कारण इसका उद्घाटन नहीं हो सका।

गौरतलब है कि अफ्रीकन स्वाइन फीवर (एएसएफ) का पहला मामला पहली बार देश में फरवरी 2020 में असम में पाया गया था। अफ्रीकन स्वाइन फीवर घरेलू और जंगली दोनों सूअरों को प्रभावित करता है। जहां स्वाइन फ्लू जानवरों से मनुष्यों में फैल सकता है वहीं, अफ्रीकन स्वाइन फीवर सूअरों से मनुष्यों में नहीं फैल सकता है।

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