गौरतलब है कि नए स्ट्रेन की वजह से कई देशों में कोरोना के मामले काफी तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन सबसे ज्यादा मामले एशिया में सामने आए हैं। सिर्फ भारत की बात करें तो यहां 12 अप्रैल को 1.61 लाख नए केस मिले तो 13 अप्रैल को 1.85 लाख संक्रमित सामने आए। ये आंकड़े पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा हैं। भारत में बिगड़ते हालात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि गुजरात के सूरत में लगातार अंतिम संस्कार होने की वजह से शवदाह गृह की चिमनियां पिघल गईं।
गौरतलब है कि कोरोना का नया स्ट्रेन ब्रिटेन में 15 दिसंबर 2020 के दौरान ट्रेस किया गया था। इसे यूके स्ट्रेन का नाम दिया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि यह स्ट्रेन बेहद संक्रामक है, जिसका असर भी नजर आया। इस खौफनाक स्ट्रेन की वजह से सबसे पहले ब्रिटेन में हालात बिगड़े, जिसके बाद 4 जनवरी 2021 को प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने देश में दूसरे लॉकडाउन का एलान कर दिया।
बता दें कि ब्रिटेन अब यूके स्ट्रेन से काफी हद तक उबर चुका है। यहां रोजाना मिलने वाले संक्रमितों की संख्या 4 हजार से नीचे पहुंच चुकी है, जबकि शुरुआत में रोजाना 55 हजार से ज्यादा मामले सामने आ रहे थे। अब सवाल उठता है कि आखिर ब्रिटेन ने अपने यहां मिले इस खौफनाक वैरिएंट पर खुद कैसे काबू पाया? बता दें कि 97 दिन के लॉकडाउन के बाद ब्रिटेन अनलॉक होने लगा है। इसे दुनिया का सबसे लंबा लॉकडाउन माना जा रहा है।
कोरोना के नए वैरिएंट से निपटने के लिए ब्रिटेन ने सख्त कदम उठाए। स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय तत्काल प्रभाव से बंद कर दिए गए। पढ़ाई पर असर न पड़े, इसके लिए ऑनलाइन क्लासेज पर जोर दिया गया। लोगों को ताकीद किया गया कि लॉकडाउन के दौरान वे अपने घरों में ही रहें। सिर्फ जरूरी काम होने पर बाहर निकलने की इजाजत दी गई। पब-रेस्टोरेंट भी पूरी तरह बंद कर दिए गए। सिर्फ टेकअवे और डिलीवरी ही जारी रखी गई। वहीं, थिएटर और सिनेमा हॉल पर भी पाबंदियां लगा दी गईं। इसके अलावा हर युवा को सप्ताह में दो बार कोरोना टेस्ट कराने की सलाह दी गई। साथ ही, टीकाकरण की गति बढ़ाई गई और लॉकडाउन के दौरान तीन करोड़ से ज्यादा लोगों को टीका लगाया गया।
97 दिन के लॉकडाउन के बाद ब्रिटेन अनलॉक होने लगा है। दुकानें, जिम, जू, हेयर ड्रेसर, बीयर गार्डन और सभी तरह की आउटडोर हॉस्पिटैलिटी दोबारा शुरू कर दी गई हैं, लेकिन इसके बीच एक सवाल उठने लगा है कि क्या अब ब्रिटेन में खतरा टल गया है? बता दें कि इसे लेकर वैज्ञानिक स्पष्ट तौर पर कुछ नहीं कह पा रहे हैं। वहीं, पीएम बोरिस जॉनसन ने लोगों से अपील की कि वे ब्रेफिक्र न हों और जल्द से जल्द वैक्सीन लगवाएं। साथ ही, लक्षण न होने पर भी टेस्ट कराएं। जॉनसन बोले कि हम अब भी नहीं जानते कि वैक्सीन कितनी सुरक्षा दे पाएगी? वहीं, ब्रिटिश वैज्ञानिकों का कहना है कि सरकार लॉकडाउन समय से पहले हटा रही है। इससे जोखिम बढ़ सकता है। उन्होंने देश में तीसरी लहर आने की आशंका भी जताई।