वन रैंक वन रैंकिंग (ओआरओपी) में विसंगतियों के आरोप पर सरकार को दिसंबर तक सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल करना है। इंडियन एक्स सर्विसमैन मूवमेंट एवं अन्य द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने सरकार को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने के लिए कहा है।
अभी तक सरकार की ओर से जवाब दाखिल नहीं किया गया है लेकिन अगले महीने तक उसे सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल कर उसे अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी। याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि मोदी सरकार ने कहने को तो ओआरओपी लागू कर दिया है लेकिन ओआरओपी की परिभाषा ही बदल दी गई है। आरोप लगाया गया है कि सरकार ने मनमाने और बड़ी चालाकी से ओआरओपी की परिभाषा और स्वरूप को बदल दिया गया।
सरकार ने अपने हिसाब से इसकी परिभाषा बदल कर ओआरओपी के वास्तविक स्वरूप की हत्या कर दी। याचिका में कहा गया है कि ओआरओपी को सही तरीके से लागू न करना मूल अधिकारों का हनन है।
पूर्व सैनिकों के एसोसिएशन द्वारा दाखिल इस याचिका में यूपीए-दो सरकार द्वारा तैयार की गई ‘वन रैंक वन पेंशन’ को लागू करने की गुहार की गई है। उनका कहना है कि यूपीए-दो सरकार के वक्त तैयार किया गया ढांचा सैनिकों के हित में हैं। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में लेकर अगले वर्ष दो जनवरी को सुनवाई होनी है। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील राम जेठमलानी पैरवी कर रहे हैं।