भारतीय आयुध निर्माणी सेवा अधिकारी संघ (आईओएफएसओए) ने विभिन्न रक्षा कर्मचारी महासंघों के साथ मिलकर, सात नवगठित रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (डीपीएसयू) के विलय पैकेज पर प्रस्तावित बैठक का बहिष्कार किया है। भारत सरकार द्वारा 41 आयुध निर्माणियों को सात सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (डीपीएसयू) में विभाजित करने का निर्णय लिए हुए चार वर्ष से अधिक समय हो गया है। पूर्ववर्ती आयुध निर्माणियों के 70,000 से अधिक केंद्र सरकार के कर्मचारी तब से इन नए निगमों में बिना किसी प्रतिनियुक्ति भत्ते के, प्रतिनियुक्ति के आधार पर काम कर रहे हैं।
अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ (एआईडीईएफ) के महासचिव सी. श्रीकुमार के मुताबिक, रक्षा असैन्य कर्मचारी और उनके महासंघ, लंबे समय से निगमीकरण के इस कदम का विरोध कर रहे हैं। 41 आयुध निर्माणियों को सात सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (डीपीएसयू) में विभाजित करने के केंद्र सरकार के फैसले को विभिन्न उच्च न्यायालयों में चुनौती दी गई है। हालांकि अदालतों ने कहा है कि निगमीकरण एक नीतिगत निर्णय है, जिसमें न्यायिक हस्तक्षेप नहीं हो सकता। मद्रास उच्च न्यायालय ने अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ (एआईडीईएफ) द्वारा दायर एक मामले में रक्षा मंत्रालय का एक महत्वपूर्ण आश्वासन दर्ज किया है।