सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को उच्च स्तरीय कमेटी की उस रिपोर्ट को पेश करने के लिए कहा है जिसमें मुस्लिम सहित अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों में विवाह, तलाक, अभिरक्षण अधिकार आदि पर्सनल लॉ के पहुलओं का परीक्षण किया गया था।
इसके साथ ही ट्रिपल तलाक, बहुविवाह सहित पर्सनल लॉ के कई प्रावधान के कारण प्रताड़ना का शिकार हो रही मुस्लिम महिलाओं के मसले पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को विस्तृत सुनवाई शुरू कर दी। इस मामले में न केवल सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है बल्कि कई अन्य याचिकाएं भी दाखिल की गई है।
चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर और न्यायमूर्ति यूयू ललित की पीठ ने केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) तुषार मेहता को छह हफ्ते में ‘महिला एवं कानून’ पर गठित उच्च स्तरीय कमेटी की रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा है। अब तक इस रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया है।