जनवरी 2016 के सरकारी आदेश को इंडियन एसोसिएशन ऑफ लॉयर्स और आम आदमी पार्टी की ओर से हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने यह दलील दी कि उसने इस आदेश को जनवरी 2022 में रद्द कर दिया है।
केरल की सत्तारूढ़ वाम सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की 'टी' शाखा को सूचना के अधिकार (आरटीआई) कानून के दायरे से बाहर रखने के आदेश को रद्द कर दिया गया है।
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राज्य सरकार ने केरल हाईकोर्ट को बताया है कि उसने पिछले साल जनवरी में अपने 2016 के आदेश को रद्द कर दिया था, जिसके द्वारा राज्य सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की 'टी' शाखा को पारदर्शिता कानून के दायरे से छूट दी गई थी।
जनवरी 2016 के सरकारी आदेश को इंडियन एसोसिएशन ऑफ लॉयर्स और आम आदमी पार्टी की ओर से हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। दो याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष राज्य सरकार ने यह दलील दी।
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वकीलों के संगठन और राजनीतिक दल ने दलील दी थी कि राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की (टी) शाखा कोई सुरक्षा संगठन या खुफिया एजेंसी नहीं है और यह विशुद्ध रूप से लोकसेवकों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों की जांच के लिए एक जांच इकाई है।
याचिकाओं में आरोप लगाया गया था कि राज्य सरकार की असली मंशा जनता को अपने ही मंत्रियों और अधिकारियों के खिलाफ राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा जांच किए गए मामलों के बारे में जानकारी प्राप्त करने से रोकना है।
उन्होंने यह भी तर्क दिया था कि 2016 का सरकारी आदेश आरटीआई अधिनियम के उद्देश्य और लक्ष्य के खिलाफ है और साथ ही संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत गारंटीकृत मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है।
दूसरी ओर, राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि 2016 के आदेश को जनवरी 2022 में रद्द कर दिया गया था। सरकार की दलीलों के मद्देनजर कोर्ट ने कहा कि वह याचिकाओं के गुण-दोष पर गौर नहीं करने जा रही है। कोर्ट ने याचिकाओं को बंद कर दिया।