जेडीएस नेता एचडी कुमार स्वामी गठबंधन धर्म निभाने और भविष्य की सरकार का खाका तैयार करने सोमवार शाम दिल्ली पहुंचे थे। कुमार स्वामी कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और सोनिया गांधी से मिलने पहुंचे लेकिन उससे पहले उन्होंने चुनाव पूर्व की सहयोगी बहुजन समाज पार्टी को तरजीह दी। कुमार स्वामी सबसे पहले बसपा नेत्री मायावती से मिलने उनके आवास पर पहुंचे। जहां मायावती ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।
कर्नाटक में बसपा ने चुनाव से पहले जेडीएस के साथ तालमेल किया था और बसपा का एक विधायक जीतकर भी आया है। बतातें हैं कि कांग्रेस और जेडीएस के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने में मायावती की भी भूमिका रही है। कुमार स्वामी विपक्ष की राजनीति में वो कड़ी बनने जा रहे हैं जो विपक्ष की बिखरी माला को जोड़ने का काम करेगी। कुमार स्वामी की मुलाकात दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से भी हुई। स्वामी ने उन्हें भी अपने शपथ ग्रहण समारोह के लिए आमंत्रित किया है।
आमतौर पर अभी तक विपक्ष की जो भी बैठकें हो रही थीं कहीं न कहीं आम आदमी पार्टी साथ नहीं दिखाई देती थी। हालांकि बजट सत्र में आप के सांसद विपक्ष के साथ दिखाई दिए थे। उत्तर प्रदेश की राजनीति में पिछले 22 सालों से एक दूसरे के धुर विरोधी रहे सपा और बसपा नेता पहली बार मंच साझा करते नजर आएंगे। हालांकि 1995 में स्टेट गेस्ट हाउस कांड के बाद मुलायम सिंह और मायावती एक दूसरे के जबरदस्त विरोधी बन गए थे लेकिन पिछले दिनों अखिलेश यादव के सपा की कमान संभालने के बाद उपचुनाव में दोनों दलों ने तालमेल किया लेकिन मंच साझा नहीं किया।
शपथ ग्रहण समारोह में भाजपा विरोधी पार्टियों के मुख्यमंत्रियों में ममता बनर्जी, नवीन पटनायक, कैप्टन अमरिंदर सिंह, चंद्रबाबू नायडू, के.चंद्रशेखर राव केरल के सीएम पिनरई विजयन के अलावा राजद नेता तेजस्वी यादव, डीएमके के स्टालिन, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, एनसीपी नेता शरद पवार और सीपीएम नेता सीताराम येचुरी आदि प्रमुख नेता शामिल होंगे।