भारत के भ्रष्टाचार निरोधक प्राधिकरण लोकपाल ने सात लग्जरी बीएमडब्ल्यू कार का एक सार्वजनिक टेंडर जारी किया है, जिसे लेकर सियासी घमासान मच गया है। भारत के लोकपाल की ओर से सात उच्च-स्तरीय बीएमडब्ल्यू 330 Li (लॉन्ग व्हील बेस) वाहनों की खरीद के लिए जारी की गई सार्वजनिक निविदा पर भ्रष्टाचार विरोधी लोकपाल ने सात शानदार बीएमडब्ल्यू कारों की खरीद के लिए एक निविदा जारी की है, जिनकी कुल कीमत लगभग 5 करोड़ रुपये है। इस टेंडर की विपक्षी दलों और भ्रष्टाचार विरोधी कार्यकर्ताओं ने कड़ी निंदा की है और संस्था की प्राथमिकताओं और प्रदर्शन रिकॉर्ड पर सवाल उठाए हैं।
कांग्रेस नेता उदित राज ने पूछ सवाल?
कांग्रेस नेता उदित राज ने जारी टेंडर पर कहा कि लोकपाल प्रधानमंत्री के पदचिन्हों पर चल रहे हैं। मैंने कभी नहीं सुना कि लोकपाल ने कोई काम किया हो। लोकपाल के काम पर सवाल उठाते हुए उदित राज ने कहा कि लोकपाल ने कौन सा भ्रष्टाचार उजागर किया? ये भ्रष्ट लोग भ्रष्टाचार के बारे में क्या करेंगे? वे बस आनंद ले रहे हैं। उनमें कोई नैतिकता नहीं बची है।
प्रशांत भूषण का तीखा हमला
इंडिया अगेंस्ट करप्शन (IAC) आंदोलन के एक प्रमुख व्यक्ति, जनहित वकील प्रशांत भूषण ने इस मुद्दे पर तीखा हमला किया और सरकार पर संस्था को कमजोर करने का आरोप लगाया। भूषण ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "मोदी सरकार ने लोकपाल संस्था को कई वर्षों तक खाली रखकर और फिर ऐसे चापलूस सदस्यों की नियुक्ति करके, जिन्हें भ्रष्टाचार से कोई फर्क नहीं पड़ता और जो अपनी विलासिता से खुश हैं, धूल में मिला दिया है। अब वे अपने लिए 70 लाख की BMW कारें खरीद रहे हैं!"
इधर, कांग्रेस प्रवक्ता शमा मोहम्मद ने एक्स पर लिखा, "लोकपाल अपने लिए ₹5 करोड़ की 7 लग्जरी BMW कारें खरीदना चाहता है। यह वही संस्था है जिसे तथाकथित 'इंडिया अगेंस्ट करप्शन' आंदोलन के बाद भ्रष्टाचार से लड़ना था। यह आंदोलन आरएसएस द्वारा समर्थित था और केवल कांग्रेस सरकार को गिराने के लिए बनाया गया था।"
कांग्रेस नेता सरल पटेल ने संस्था के कामकाज को चुनौती देते हुए कहा, "भारत का लोकपाल 5 करोड़ रुपये की 7 लग्जरी BMW कारें खरीद रहा है। क्या इस लोकपाल ने पिछले 11 साल में एक भी मामले पर कार्रवाई की है?"
ऐशोआराम में डूबा लोकपाल- टीएमसी
वहीं टीएमसी की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने तीखा हमला करते हुए एक्स पोस्ट में लिखा, "लोकपाल को भ्रष्टाचार की जांच करनी चाहिए, लेकिन वह खुद ऐशोआराम में डूबा है। यह बेहद खराब संदेश है। याद रखिए, लोकपाल के चेयरमैन वही जस्टिस ए.एम. खानविलकर हैं जिन्होंने सेवानिवृत्ति से पहले PMLA मामले में ED को असीमित शक्तियां दी थीं"