मानसून सत्र में इस बार लगातार हंगामा देखने को मिल रहा है। विपक्ष बिहार में चल रहे एसआईआर पर चर्चा को लेकर अड़ा हुआ है। इस बीच संसद में बिहार के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर चल रही गतिरोध खत्म करने के लिए विपक्ष ने चुनावी सुधार पर चर्चा की पेशकश की है। विपक्ष का कहना है कि इसे मध्यम रास्ता माना जा सकता है ताकि संसद में कामकाज फिर से शुरू हो सके। सरकार ने अभी तक इस प्रस्ताव पर कोई जवाब नहीं दिया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि सरकार इस पर सहमति देने की संभावना कम है।
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किरेन रिजिजू के बयान पर क्या बोले जयराम रमेश?
लोकसभा में संसद कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि नियमों के तहत कोर्ट में चल रहे मामलों पर चर्चा नहीं हो सकती और चुनाव आयोग जैसे स्वतंत्र संस्थाओं के कामकाज पर संसद में चर्चा नहीं की जा सकती। वहीं कांग्रेस के जनसंपर्क महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि चुनाव सुधारों और चुनाव आयोग के कामकाज पर संसद में पहले भी कई बार चर्चा हो चुकी है। उन्होंने अपने साथी सांसद गौरव गोगोई के ट्वीट का हवाला दिया जिसमें 1961 से लेकर 2019 तक चुनाव सुधारों पर विभिन्न मौकों पर हुई चर्चाओं का जिक्र है।
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गोगोई ने की सरकार से अपील
वहीं मामले में गोगोई ने बताया कि 1961 में राज्यसभा में चुनाव नियमों में संशोधन पर चर्चा हुई थी, 1981 में चुनाव कानूनों की समीक्षा के लिए समिति बनाने का प्रस्ताव आया था, और 2019 में चुनाव सुधारों पर शॉर्ट डिस्कशन हुई थी। उन्होंने सरकार से अपील की कि चुनाव सुधारों पर चर्चा जल्द होनी चाहिए। विपक्ष का आरोप है कि बिहार में एसआईआर का उद्देश्य बड़ी संख्या में वोटरों को वोट से वंचित करना है ताकि राज्य चुनाव में सरकार को फायदा हो। पिछले कुछ हफ्तों से संसद में ज्यादातर दिन इस मुद्दे पर हंगामे के कारण कामकाज ठप पड़ा हुआ है।