इस बीच ममता ने कहा है कि बसपा की ओर से सतीश मिश्र का आना भी हमारे लिए अहम है। उन्होंने कहा कि कि अबकी लोकसभा चुनावों में क्षेत्रीय दलों की भूमिका ही निर्णायक होगी। ममता ने कहा भाजपा के कुशासन के खिलाफ एकजुट भारत रैली होगी। उनका दावा है कि लोकसभा में भाजपा 125 से ज्यादा सीटें नहीं जीत सकेगी। उसके मुकाबले क्षेत्रीय दलों को ज्यादा सीटें मिलेंगी। तृणमूल कांग्रेस को उम्मीद है कि इस रैली के बाद ममता बनर्जी की छवि एक ऐसे कद्दावर नेता के तौर पर उभरेगी जो लोकसभा चुनावों के बाद तमाम दलों को साथ लेकर भाजपा को चुनौती देने में सक्षम हैं।
क्या इस रैली के बाद तृणमूल कांग्रेस राष्ट्रीय राजनीति में अहम भूमिका निभाने के लिए सामने आएगे? इस सवाल पर पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता कि ममता देश में विपक्ष की सबसे लोकप्रिय नेताओं में शामिल हैं और भाजपा के खिलाफ लड़ाई में वे दूसरे दलों को भी साथ लेने में सक्षम हैं। केंद्रीय मंत्री व मुख्यमंत्री के तौर पर उनके पास लंबा अनुभव भी है। बाकी तो लोगों पर निर्भर है कि वे ममता को किस भूमिका में देखना चाहते हैं। इस रैली के लिए होने वाले प्रचार के दौरान तृणमूल के तमाम नेता ममता के नेतृत्व में ही केंद्र में अगली सरकार के गठन का दावा करते रहे हैं।