अखिल भारतीय पसमांदा मुस्लिम महाज के अध्यक्ष अनवर अंसारी ने रविवार को कहा कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को पिछड़े और दलित मुसलमानों, विशेषकर ओबीसी और एससी श्रेणियों के तहत आरक्षण की मांगों पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। उन्होंने कहा कि समुदाय भाजपा या एआईएमआईएम का समर्थन नहीं कर सकता।
अंसारी ने कहा, पसमांदा मुसलमान जीवनभर गैर-भाजपा पार्टियों को वोट देते रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह समय प्रतिनिधित्व की कमी, आर्थिक संकट और समुदाय द्वारा झेले जा रहे अत्याचारों पर उनसे जवाब मांगने का है।
महाज और समुदाय के कई अन्य संगठनों ने रविवार को सभी क्षेत्रीय दलों और कांग्रेस को एक पत्र लिखकर समुदाय के मुद्दों और मांगों, खासतौर पर अनुसूचित जाति (एससी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणियों के तहत आरक्षण पर उनका रुख मांगा।
अंसारी ने एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस, राजद, सपा, जदयू और बसपा जैसी पार्टियों ने पसमांदा मुसलमानों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं दिया और उनके मुद्दों को अपनी राजनीति का हिस्सा बनाने में विफल रहे।
उन्होंने आगे कहा कि विपक्षी दल अपने प्रवचनों में पसमांदा और धर्मनिरपेक्षता शब्दों से बचते रहे हैं। हम चाहते हैं कि विपक्षी दल एक स्टैंड लें और सरकार पर दलित इसाइयों और दलित मुसलमानों को एससी का दर्जा देने का दबाव डालें क्योंकि वे किसी भी पार्टी के लिए केवल एक वोट बैंक नहीं हैं और हमेशा सांप्रदायिकता के खिलाफ रहे हैं।
अंसारी ने कहा कि समुदाय के साथ खड़े होने की जिम्मेदारी विपक्ष की है। उन्होंने कहा कि बिलकिस बानो से ज्यादा पसमांदा कोई नहीं हो सकता। उन्होंने आगे कहा कि समुदाय भाजपा और एआईएमआईएम जैसी अन्य विभाजनकारी ताकतों का समर्थन करेगा।
संगठनों ने तर्क दिया है कि गैर-अशरफ मुसलमानों को भी हिंदुओं के बीच पिछड़े और अनुसूचित जाति समुदायों की तरह जातिगत भेदभाव का सामना करना पड़ता है और वे सांप्रदायिक हिंसा का सबसे अधिक शिकार होते हैं।
हाल ही में हैदराबाद में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं से पसमांदा मुस्लिम समुदाय तक पहुंचने के लिए कहा था।