फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आज से मोदी सरकार का इम्तिहान, आक्रामक रणनीति अपनाने के मूड में विपक्ष

Mon, 29 Jan 2018 11:51 AM IST
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
संसद
विज्ञापन
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अभिभाषण के साथ सोमवार 29 जनवरी को मोदी सरकार के आखिरी बजट सत्र का आगाज हो गया है। इस बजट को मोदी सरकार की परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है। बजट सत्र को सुचारु रूप से चलाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में रविवार को सर्वदलीय बैठक हुई। बैठक में जहां प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रीय हित में राजनीतिक दलों से विचारधारा से ऊपर उठकर सहयोग की अपील की, वहीं विपक्ष ने अपनी ताकत बढ़ानी शुरू कर दी। विपक्ष के रुख से साफ है कि वह केंद्र को बख्शने के मूड में नहीं है। विपक्ष का रुख देखकर सत्ता पक्ष भी सरकार की नीति के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ आक्रामक रणनीति अपनाने के पक्ष में है।
विज्ञापन


इसलिए है परीक्षा?

बजट सत्र का पहला चरण 29 जनवरी 9 फरवरी और दूसoरा चरण पांच मार्च से 6 अप्रैल तक चलेगा। इस तरह से पहले सत्र में 10 दिन दूसरे सत्र में करीब 23 दिन सदन का कामकाज चलने की संभावना है। इस क्रम में केंद्र एक फरवरी को अपना आखिरी बजट पेश करने जा रही है। मोदी सरकार के इस बजट से देश के हर वर्ग को बड़ी आस है। नौकरी पेशा जहां आयकर में राहत की उम्मीद देख रहा है, वहीं आमजन जीएसटी, नोटबंदी के बाद बड़े राहत की उम्मीद कर रहे हैं। देश में बढ़ रही बेरोजगारी, महंगाई, पेट्रोलियम पदार्थों के दाम समेत आदि मुद्दे मुंह फैलाए खड़े हैं।

सरकार के दावे और हकीकत के बीच की दूरी सत्ता पक्ष के लिए परेशानी का सबब हो सकती है। खेती, खलिहानी और किसानों की स्थिति भी सरकार के लिए परेशानी का सबब है। मोदी सरकार ने वादा किया था कि वह किसानों को उसके उत्पादन का उचित मूल्य दिलाएगी, किसानों की लागत में 50 फीसदी की कमी आाएगी तथा इन सुधारों से किसानों की आय में दोगुना इजाफा होगा। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है। इसी तरह से सरकार की तमाम फ्लैगशिप योजनाओं को लेकर भी विपक्ष हमलावर है। विपक्ष लगातार सरकार की आर्थिक नीतियों की आलोचना कर रहा है। कांग्रेस के प्रमोद तिवारी का कहना है कि मोदी सरकार ने देश की जनता से जो भी वादा किया था, उसमें वो हर मोर्चे पर फेल है।
विज्ञापन


राष्ट्रपति के अभिभाषण में दिखेगा दीन ईमान

राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद का अभिभाषण केंद्र सरकार की नीतियों, उसके दीन-ईमान का आईना होगा। राष्ट्रपति जहां अपनी सरकार की नीतियों के बारे में बताएंगे, वहीं इसके भावी स्वपि और चुनौतियों की रूपरेखा भी पेश करेंगे। वह केंद्र सरकार के कामकाज तथा हासिल हुई उपलब्धियों का एक लेखा-जोखा भी पेश करेंगे। दरअसल राष्ट्रपति का अभिभाषण केंद्र सरकार की पिछले साल की उपलब्धियों का सरकारी दस्तावेज होता है। इसमें उपलब्धिों के साथ-साथ आगामी साल का विजन होता है। राष्ट्रपति अभिभाषण के बाद केंद्र सरकार आर्थिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट जारी करेंगी। इस रिपोर्ट में महंगाई, बेरोजगारी, औद्योगिक उत्पादन, ग्रामीण विकास, कृषि समेत अन्य  क्षेत्रों में केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों की झलक देखने को मिलेगी।

तीन तलाक पर देखने को मिल सकता है टकराव

तीन तलाक के बिल को लोकसभा की मंजूरी मिल गई है। संसद के बजट सत्र में इसे राज्यसभा की मंजूरी मिलनी बाकी है। मोदी सरकार जहां इस बिल को पास कराने के लिए ऐड़ी चोटी का जोर लगाएगी, वहीं विपक्ष सरकार को आईना दिखाने की कोशिश कर सकता है। इस बिल के बहाने अल्पसंख्यक समुदाय को केंद्र में रखकर राजनीतिक टकराव देखने को मिल सकता है। जीएसटी को लेकर लगातार बनी भ्रम की स्थिति को विपक्ष सत्ता पर राजनीतिक हमले का हथियार बना सकता है।
विज्ञापन

नरेंद्र मोदी
सूट-बूट की सरकार से आगे जा सकते हैं राहुल गांधी

मोदी सरकार को सूट-बूट की सरकार के तंज से घेरने वाले राहुल गांधी ने 2015 के आम बजट में कालेधन पर सरकार को घेरा था। तब राहुल गांधी ने तंज कसते हुए केंद्र सरकार की काले को गोरा बनाने वाली क्रीम जैसा करार दिया था। यह मोदी सरकार का आखिरी बजट सत्र है। माना जा रहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष इस आखिरी बजट में केंद्र को घेरने से नहीं चूकेंगे। विपक्ष के पास अंतरराष्ट्रीय फ्रंट से लेकर देश के अंदरूनी मामलों में मुद्दों की कोई कमी नहीं है। केंद्र सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं से लेकर अन्य पर कांग्रेस अध्यक्ष फिर कोई नया तंज कस सकते हैं। विपक्ष अपना कुनबा बढ़ाने में लगा है और माना जा रहा है कि बजट सत्र में विपक्षी एकता की झलक देखने को मिल सकती है।

सत्ता पक्ष भी कमर कसकर तैयार

विपक्ष की राजनीति का जवाब देने के लिए सत्ता पक्ष भी तैयार है। प्रधानमंत्री ने एनसीसी के कार्यक्रम में पहले ही भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार के रुख का जिक्र करके मोर्चा खोल दिया है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा है कि अब दौर बदल चुका है। पहले जहां भ्रष्टाचार करने वाले बड़े-बड़े लोगों पर कार्रवाई नहीं होती थी, वहीं आज तीन पूर्व मुख्यमंत्री जेल में सड़ रहे हैं।

चुनावी साल... बस वादा करने वाली सरकार

अगले साल आम चुनाव प्रस्तावित हैं। इससे पहले त्रिपुरा, मेघालय, कर्नाटक समेत कुछ राज्यों में अगले महीनों में चुनाव होने हैं। साल के अंत में राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव होना है। इन चुनावों को आम चुनाव से पहले का सेमीफाइनल माना जा रहा है। ऐसे में आम बजट को मोदी सरकार के करीब चार साल का पूरा लेखा-जोखा माना जा रहा है। ऐसा समझा जा रहा है कि इससे सरकार के कामकाज की जो आर्थिक तस्वीर उभरेगी, वह पूरे देश में सरकार को लेकर एक समझ को विकसित करेगी। विपक्ष की पूरी कोशिश मोदी सरकार को केवल वादा करने वाली सरकार साबित करने की है।

विपक्ष लगातार मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों को कठघरे में खड़ा करने, पुरानी सरकार की ही योजनाओं को लागू करने, देश में जाति-धर्म के आधार पर बंटवारा को बढ़ावा देने तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की साख गिरने, सीमा पर तनाव बढऩे का आरोप लगा रहा है। जबकि इसके बरक्स मोदी सरकार का पूरा जोर देश में व्यवस्था परिवर्तन करने, सुधार के कदम उठाने, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की साख बनाने, आर्थिक ढांचे को दुरुस्त करने, जीएसटी तथा नोटबंदी के माध्यम से भ्रष्टाचार और काले धन पर लगाम कसने का संदेश देने का है। सरकार सबका साथ, सबका विकास की थीम को नए पड़ाव पर ले जाने की तैयारी में है।

इन मुद्दों की संसद में सुनाई देगी गूंज

1. पद्मावती फिल्म पर विवाद
2. कासगंज में जारी तनाव की स्थिति
3. गणतंत्र दिवस पर परेड के दौरान राजपथ पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को चौथी पंक्ति पर जगह देना
4. न्यायपालिका में जारी शीर्ष न्यायाधीशों में विवाद की स्थिति
5. जम्मू-कश्मीर से लगती सीमा पर बढ़ती तनाव की स्थिति तथा राज्य के अंदरूनी हालात
6. हरियाणा में महिलाओं के खिलाफ बढ़ रही बलात्कार और हिंसा की स्थिति
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें