के आखिरी बजट सत्र का आगाज हो गया है। इस बजट को मोदी सरकार की परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है। बजट सत्र को सुचारु रूप से चलाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में रविवार को सर्वदलीय बैठक हुई। बैठक में जहां प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रीय हित में राजनीतिक दलों से विचारधारा से ऊपर उठकर सहयोग की अपील की, वहीं विपक्ष ने अपनी ताकत बढ़ानी शुरू कर दी। विपक्ष के रुख से साफ है कि वह केंद्र को बख्शने के मूड में नहीं है। विपक्ष का रुख देखकर सत्ता पक्ष भी सरकार की नीति के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ आक्रामक रणनीति अपनाने के पक्ष में है।
इसलिए है परीक्षा?
बजट सत्र का पहला चरण 29 जनवरी 9 फरवरी और दूसoरा चरण पांच मार्च से 6 अप्रैल तक चलेगा। इस तरह से पहले सत्र में 10 दिन दूसरे सत्र में करीब 23 दिन सदन का कामकाज चलने की संभावना है। इस क्रम में केंद्र एक फरवरी को अपना आखिरी बजट पेश करने जा रही है। मोदी सरकार के इस बजट से देश के हर वर्ग को बड़ी आस है। नौकरी पेशा जहां आयकर में राहत की उम्मीद देख रहा है, वहीं आमजन जीएसटी, नोटबंदी के बाद बड़े राहत की उम्मीद कर रहे हैं। देश में बढ़ रही बेरोजगारी, महंगाई, पेट्रोलियम पदार्थों के दाम समेत आदि मुद्दे मुंह फैलाए खड़े हैं।
सरकार के दावे और हकीकत के बीच की दूरी सत्ता पक्ष के लिए परेशानी का सबब हो सकती है। खेती, खलिहानी और किसानों की स्थिति भी सरकार के लिए परेशानी का सबब है। मोदी सरकार ने वादा किया था कि वह किसानों को उसके उत्पादन का उचित मूल्य दिलाएगी, किसानों की लागत में 50 फीसदी की कमी आाएगी तथा इन सुधारों से किसानों की आय में दोगुना इजाफा होगा। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है। इसी तरह से सरकार की तमाम फ्लैगशिप योजनाओं को लेकर भी विपक्ष हमलावर है। विपक्ष लगातार सरकार की आर्थिक नीतियों की आलोचना कर रहा है। कांग्रेस के प्रमोद तिवारी का कहना है कि मोदी सरकार ने देश की जनता से जो भी वादा किया था, उसमें वो हर मोर्चे पर फेल है।
राष्ट्रपति के अभिभाषण में दिखेगा दीन ईमान
राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद का अभिभाषण केंद्र सरकार की नीतियों, उसके दीन-ईमान का आईना होगा। राष्ट्रपति जहां अपनी सरकार की नीतियों के बारे में बताएंगे, वहीं इसके भावी स्वपि और चुनौतियों की रूपरेखा भी पेश करेंगे। वह केंद्र सरकार के कामकाज तथा हासिल हुई उपलब्धियों का एक लेखा-जोखा भी पेश करेंगे। दरअसल राष्ट्रपति का अभिभाषण केंद्र सरकार की पिछले साल की उपलब्धियों का सरकारी दस्तावेज होता है। इसमें उपलब्धिों के साथ-साथ आगामी साल का विजन होता है। राष्ट्रपति अभिभाषण के बाद केंद्र सरकार आर्थिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट जारी करेंगी। इस रिपोर्ट में महंगाई, बेरोजगारी, औद्योगिक उत्पादन, ग्रामीण विकास, कृषि समेत अन्य क्षेत्रों में केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों की झलक देखने को मिलेगी।
तीन तलाक पर देखने को मिल सकता है टकराव
तीन तलाक के बिल को लोकसभा की मंजूरी मिल गई है। संसद के बजट सत्र में इसे राज्यसभा की मंजूरी मिलनी बाकी है। मोदी सरकार जहां इस बिल को पास कराने के लिए ऐड़ी चोटी का जोर लगाएगी, वहीं विपक्ष सरकार को आईना दिखाने की कोशिश कर सकता है। इस बिल के बहाने अल्पसंख्यक समुदाय को केंद्र में रखकर राजनीतिक टकराव देखने को मिल सकता है। जीएसटी को लेकर लगातार बनी भ्रम की स्थिति को विपक्ष सत्ता पर राजनीतिक हमले का हथियार बना सकता है।