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नुकसान को लेकर चिंतित है सेना, लेकिन AFSPA पर फिर से विचार का अभी समय नहीं: रावत

Mon, 29 Jan 2018 05:34 AM IST
एजेंसी, नई दिल्ली
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afspa
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जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों में लागू सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम (अफस्पा) पर फिर से विचार करने या इसके प्रावधानों को हल्का करने की खबरों को सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा है, अभी इसका समय नहीं आया। सेना जम्मू-कश्मीर जैसी जगह पर काम करते समय मानवाधिकारों की रक्षा के लिए पर्याप्त सावधानी बरत रही है।
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जनरल रावत का यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ऐसी खबरें आईं थीं कि अफस्पा को हटाने या कम से कम कुछ प्रावधानों को हल्का करने पर रक्षा और गृह मंत्रालय में कई दौर की उच्च-स्तरीय वार्ता हो चुकी है। यह अधिनियम सुरक्षा बलों को जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर के कुछ अशांत इलाकों में विशेष सुरक्षा अधिकार देता है। लंबे समय से इसे हटाने की मांग की जाती रही है। एक साक्षात्कार में तीन राज्यों में अफस्पा के प्रावधानों को हल्का किए जाने से संबंधित सवाल के जवाब में जनरल रावत ने कहा, मुझे नहीं लगता कि अभी अफस्पा पर फिर से विचार करने का समय आया है।

सेना प्रमुख ने कहा, हालांकि अफस्पा में कुछ कड़े प्रावधान हैं पर सेना अतिरिक्त नुकसान को लेकर चिंतित रहती है। यह सुनिश्चित किया जाता है कि सेना के अभियान कानून के तहत हों और स्थानीय लोगों को असुविधा न हो। उन्होंने कहा, अफस्पा के तहत जितनी सख्ती बरती जा सकती है, वैसा हमने कभी नहीं किया। हम मानवाधिकारों को लेकर बहुत चिंतित हैं। 
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पाक के लिए सेना के पास कई विकल्प 

अफस्पा
हम जानमाल की क्षति को लेकर भी चिंतित हैं। ऐसे में किसी को परेशान होने की जरूरत नहीं है। हम पर्याप्त उपाय और एहतियात बरत रहे हैं। जनरल रावत ने कहा कि हर स्तर पर कई ऑपरेशनों के लिए सेना के अपने नियम होते हैं, जिससे अफस्पा के तहत लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। उन्होंने कहा, मैं आपको आश्वस्त कर सकता हूं कि सेना का काफी अच्छा मानवाधिकार रिकॉर्ड रहा है।

यह पूछे जाने पर कि क्या पाक प्रायोजित आतंकवाद से निपटने के लिए तीनों सेनाओं को साथ लाने की रणनीति अपनाई जाए? सेना प्रमुख ने इसका सीधे तौर पर जवाब तो नहीं दिया पर इतना जरूर कहा कि सैन्य बलों के पास कई प्रकार के अभियान के लिए विकल्प उपलब्ध हैं। इनका खुलासा नहीं किया जा सकता है क्योंकि इससे दुश्मन सावधान हो सकता है। 

जनरल रावत ने बताया कि आज सभी खुफिया एजेंसियां और सुरक्षा बल मिलकर काम कर रहे हैं। सभी में गजब का तालमेल है। पिछले साल से ही सेना ने जम्मू-कश्मीर में काफी सख्त आतंक विरोधी नीति अपना रखी है। इससे आतंकियों के हौसले पस्त हुए हैं।
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