केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में प्रमुख फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 50 फीसदी की बढ़ोतरी को किसानों के साथ धोखा बताते हुए किसान संगठनों ने सरकार के खिलाफ शुक्रवार को दिल्ली में जबरदस्त प्रदर्शन किया। किसानों ने सरकार से स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के हिसाब से न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किये जाने की मांग की और कहा कि अगर सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानी तो वे अगले चुनाव में सरकार का पुरजोर विरोध करेंगे।
आल इंडिया किसान संघर्ष कोऑर्डिनेशन कमेटी (AIKSCC) के बैनर तले सीपीआई और स्वराज इंडिया के साथ दर्जनों किसान संगठनों ने इस प्रदर्शन में भाग लिया। किसान नेताओं ने अपने प्रदर्शन को केंद्र सरकार के खिलाफ किसानों द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव बताया।
ये MSP मोदी के लिए है
केंद्र सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य को किसानों के साथ मजाक बताते हुए सीपीआई नेता अतुल अंजान ने कहा कि यह MSP मिनिमम सपोर्ट प्राइस (न्यूनतम समर्थन मूल्य) नहीं, बल्कि 'मोदी सपोर्ट प्राइस' था। इसे अगले चुनाव में सरकार की हार को बचाने के लिए लाया गया था और इससे किसानों का कोई भला नहीं होने वाला।
सीपीआई नेता ने कहा कि संसद में सरकार के खिलाफ जो अविश्वास प्रस्ताव रखा गया है, सरकार अपने सत्ता बल और धनबल के आधार पर उसे बचा लेगी, लेकिन किसानों के इस अविश्वास प्रस्ताव में सरकार कभी पास नहीं होगी। महाराष्ट्र में पिछले तीन वर्षों में 10 हजार किसानों की मौत का हवाला देते हुए अंजान ने कहा कि किसानों के कर्ज को माफ करने का ढोंग खुलकर सामने आ गया है क्योंकि अगर सरकार किसानों को कर्ज के बोझ से मुक्ति दिलाने में सफल होती तो आज किसान आत्महत्या नहीं करता।
'मोदी को करेंगे बेनकाब'
किसानों के प्रदर्शन में स्वराज इंडिया के नेता योगेंद्र यादव
- फोटो : Amar Ujala
किसानों के मुद्दे पर लगातार सक्रिय स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेंद्र यादव ने कहा कि मोदी सरकार की हर नीति धनकुबेरों के हिसाब से बनाई जा रही है। कृषि बीमा के नाम पर 300 करोड़ रुपये से अधिक की राशि किसानों से ले ली गयी जबकि किसानों को 100 करोड़ रुपये का भी भुगतान नहीं किया गया। इस तरह एक वर्ष में ही 200 करोड़ से अधिक का लाभ बीमा कम्पनियों को हो चुका है। इससे साफ हो जाता है कि किसानों को दिए गए कृषि बीमा से किसकी हालत सुधारने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने कहा कि वे लगातार किसानों को इस धोखे से बचाने के लिए मुहिम चला रहे हैं, और आने वाले चुनाव के पहले मोदी सरकार को बेनकाब करेंगे। उन्होंने कहा कि अगले चार महीने तक विभिन्न चरणों में सरकार के खिलाफ उनका प्रदर्शन जारी रहेगा।
'सरकार के खिलाफ लामबंद हों किसान'
किसानों को संबोधित करते हुए प्रसिद्ध समाजसेवी मेधा पाटकर ने कहा कि इन सरकारों को पूरी ताकत किसानों के समर्थन से मिलती है, लेकिन ताकत मिलने के बाद वे उन्हीं किसानों का दमन करने लगते हैं। अब किसानों को अपनी ताकत इन सरकारों के खिलाफ दिखानी होगी।
क्या है स्वामी नाथन आयोग की सिफारिशें
किसानों के प्रदर्शन में मेधा पाटकर
- फोटो : Amar Ujala
तमिलनाडु के प्रसिद्ध कृषि वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन की अध्यक्षता में केंद्र सरकार ने 18 नवम्बर 2004 को राष्ट्रीय किसान आयोग का गठन किया था। वैज्ञानिक स्वामीनाथन के नाम पर यह स्वामीनाथन आयोग के नाम से विख्यात है। आयोग ने 2006 में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी थी जिसे तत्कालीन केंद्र सरकार ने 11 सितम्बर 2007 को स्वीकार कर लिया था। आयोग बनाने का उद्देश्य देश में कृषि और किसानों की स्थिति बेहतर करने के लिए उपाय सुझाना था। कहा जाता है कि अगर सरकार स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू कर देती तो इससे देश के किसानों और कृषि की तकदीर बदल जाती।
स्वामीनाथन आयोग ने किसानों की आत्महत्याओं को रोकने के लिए उन्हें C2 तकनीकी से आकलन के आधार पर उनकी कृषि लागत से डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य दिए जाने की सिफारिश की थी। इस तकनीकी में किसानों की खेती की जमीन का किराया भी शामिल करने की बात शामिल है। जबकि वर्तमान में सरकारें जिस तकनीकी पर न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करती हैं, उसमें उनकी कृषि लागत, उनके परिवार के द्वारा किये गए श्रम को आधार माना जाता है।
इसके अलावा आयोग ने कृषि भूमि का सुधार करने, बंजर जमीन को कृषि योग्य बनाकर खेतीविहीन कृषकों को देने की सिफारिश की थी। चूंकि प्रत्येक राज्य में कृषि भूमि, लागत और किसानों की स्थिति अलग-अलग होती है, इसलिए न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने का अधिकार राज्यों को दिए जाने की बात कही गई है।