महाराष्ट्र में किसान आत्महत्या के बढ़ते मामलों को लेकर राज्य सरकार चौतरफा घिर गई है। सोमवार को विधानसभा में इसको लेकर जमकर हंगामा हुआ। विपक्ष के नेता राधाकृष्ण विखे पाटिल ने मांग की कि यूपी और कर्नाटक की तर्ज पर आत्महत्या करने वाले किसानों के परिजनों को पांच लाख रुपये मुआवजे के तौर पर दिए जाएं। हालांकि सरकार ने कहा है कि वह सिर्फ एक लाख रुपये देगी।
कृषि मंत्री एकनाथ खड़से ने कहा कि ऐसा करने पर सवाल उठने लगेंगे कि सरकार आत्महत्या करने वाले किसानों को प्रोत्साहन दे रही है। उन्होंने कहा कि किसानों के लिए गोपीनाथ मुंडे किसान दुर्घटना बीमा लागू की गई है। इसमें किसी हादसे में विकलांग हुए किसान को दो लाख रुपये मिलेंगे।
अब सूखा प्रभावित भागों में आत्महत्या करने वाले किसान की खुदकुशी की वजह चाहे कुछ भी हो, उनके परिजनों को एक लाख रुपये की मदद की जाएगी। विधानसभा में किसान आत्महत्या पर चर्चा का जवाब देते हुए खड़से ने कहा कि अब तक आत्महत्या करने वाले किसानों की जांच की जाती थी कि उसने किस वजह से आत्महत्या की है। इसमें काफी वक्त लगता था।
कई किसान व्यसन की वजह से भी खुदकुशी कर लेते थे। ऐसे में किसानों के परिजनों को कोई मदद नहीं मिल पाती थी। अब आत्महत्या करने वाले किसान के बारे में बिना किसी जांच के उसके परिजनों को एक लाख रुपये की मदद की जाएंगी। बीते तीन साल से राज्य के किसी न किसी भाग में बारिश नहीं हुई है। इसे देखते हुए सरकार ने 15 हजार 747 गांवों को सूखा ग्रस्त घोषित किया है।