पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी ने आगामी लोकसभा चुनावों के बाद विपक्षी गठजोड़ के सत्ता में आने की स्थिति में नोटबंदी की जांच कराने और योजना आयोग को पुनर्जीवित करने का वादा किया है। बुधवार को यहां पार्टी का चुनावी घोषणापत्र जारी करते हुए उन्होंने कहा कि सौ दिनों के काम योजना को दो सौ दिनों का किया जाएगा और इसके तहत मिलने वाली मजदूरी भी बढ़ा कर दोगुनी कर दी जाएगी।
तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने कहा कि विपक्षी गठजोड़ की सरकार बनने की स्थिति में हम नोटबंदी के फैसले की जांच करेंगे और योजना आयोग को भी पुनर्जीवित करेंगे। उन्होंने कहा कि नीति आयोग किसी काम का नहीं है। ममता ने कहा कि सरकार मौजूदा वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की भी समीक्षा करेगी। अगर इससे आम लोगों को सचमुच फायदा हो रहा है तो इसे जारी रखा जाएगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसियां उनका फोन टैप कर रही हैं और उनकी बातचीत और एसएमएस की निगरानी की जा रही है। भाजपा और केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पार्टी ने लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी जैसे वरिष्ठ नेताओं के साथ बेहद अपमानजनक व्यवहार किया है। आडवाणी से मेरी फोन पर बात हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मैं भी चौकीदार’ अभियान पर व्यंग्य करते हुए तृणमूल प्रमुख ने कहा कि असली चौकीदारों के प्रति तो उनके मन में भारी सम्मान है लेकिन राजनीतिक चौकीदारों के प्रति नहीं।
उन्होंने लोकसभा चुनावों के दौरान सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के पूर्व महानिदेशक के.के. शर्मा की पश्चिम बंगाल व झारखंड के लिए विशेष पुलिस पर्यवेक्षक के तौर पर नियुक्ति पर भी सवाल उठाया। ममता ने सवाल किया कि आखिर एक सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी नौकरी में तैनात पुलिस अधिकारियों की नियुक्ति का मामला कैसे देख सकता है? उन्होंने कहा कि महानिदेशक रहते शर्मा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कार्यक्रम में हिस्सा ले चुके हैं और वह भी अपनी वर्दी में।