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रिटायर जजों की ट्रिब्यूनल में नियुक्ति न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर धब्बा : सुप्रीम कोर्ट

Thu, 28 Mar 2019 04:10 AM IST
गौरव द्विवेदी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सांकेतिक तस्वीर
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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अर्द्ध-न्यायिक न्यायाधिकरण (ट्रिब्यूनल) में रिटायर जजों की नियुक्ति को लेकर तीखी टिप्पणी की। शीर्ष अदालत ने कहा कि यह अहम दृष्टिकोण है कि रिटायरमेंट के बाद जजों की ट्रिब्यूनलों में नियुक्ति न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर धब्बे के समान है। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने देश के सभी हाईकोर्ट के हालात पर भी तीखी टिप्पणियां कीं।

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चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ संविधान पीठ उन 18 याचिकाओं की सुनवाई कर रही थी, जिनमें अर्द्धन्यायिक ट्रिब्यूनलों को संचालित करने वाले कानूनों को चुनौती दी गई थी। चीफ जस्टिस के साथ जस्टिस एनवी रमन्ना, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस संजीव खन्ना की मौजूदगी वाली पीठ ने इस सुनवाई के दौरान कहा कि अमूमन रिटायर हाईकोर्ट जज इन ट्रिब्यूनलों में नियुक्ति के इच्छुक नहीं होते, क्योंकि नियुक्तियों में बहुत देरी होती है। पीठ ने कहा, एक दृष्टिकोण है कि रिटायरमेंट के बाद नियुक्ति न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर खुद ही एक धब्बा है। आप इसे कैसे संभालेंगे? यह एक वैध और मजबूत मुद्दा है।

न्यायपालिका के ट्रिब्यूनलाइजेशन के मुद्दे पर सुनवाई करते हुए पीठ ने कहा कि यह प्रक्रिया हाईकोर्ट का बोझ कम करने के लिए की गई थी, जहां रिक्तियों की संख्या बेहद गंभीर है। शीर्ष अदालत ने सभी हाईकोर्ट में भारी संख्या में रिक्तियां होने पर अफसोस जताया और कहा कि हाईकोर्ट कॉलेजियम भी नियुक्तियों के लिए सिफारिश नहीं कर रहे हैं। पीठ ने कहा, हर समस्या के लिए सरकार को दोष नहीं देना चाहिए।
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1089 में से 397 हाईकोर्ट जजों की जगह है खाली

शीर्ष अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि देश के सभी हाईकोर्ट में कुल 1089 जजों के पद स्वीकृत हैं। पीठ ने सवाल पूछा, इनमें से कितने वास्तव में काम संभाल रहे हैं? 397 पद खाली पड़े हुए हैं। 264 के लिए हाईकोर्ट की तरफ से सिफारिश तक नहीं भेजी गई है। पीठ ने आगे व्यंग्य कसते हुए सवाल किया, यह कब आएंगी? कब उस पर काम शुरू होगा? कब नियुक्तियां होंगी और तब तक, कितने और जज रिटायर हो जाएंगे?

चार सप्ताह में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध होती है जमानत अर्जी

संविधान पीठ ने हाईकोर्ट की कार्यप्रणाली पर टिप्पणी करते हुए कहा, जितने जज मौजूद हैं, उसमें हाईकोर्ट और ज्यादा काम नहीं ले सकता। कई हाईकोर्ट में याचिका दाखिल होने के चार सप्ताह बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध होती है। यहां सुप्रीम कोर्ट में चार दिन लगते हैं। एक हाईकोर्ट में जमानत याचिका पर सुनवाई चार सप्ताह बाद होती है। 

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