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राज्यसभा में विपक्ष का आरोप, जल्दबाजी में बिल पारित कराना चाहती है सरकार

Fri, 26 Jul 2019 03:29 PM IST
गौरव द्विवेदी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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संसद भवन (फाइल फोटो) - फोटो : सोशल मीडिया
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17 विपक्षी सांसदों ने राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू को लिखा कि 'सरकार संसदीय स्थाई और चयन समितियों के बिना किसी जांच के विधेयकों को जल्दबाजी में पारित करने का तरीका अपना रही है, इस गंभीर चिंता का विषय है।' राज्यसभा की वर्तमान स्थिति की बात करें तो इस समय भाजपा के सदस्यों की संख्या 75 वहीं राजग के सदस्यों की संख्या 105 है। अमर सिंह और सुभाष चंद्रा जैसे निर्दलीय सदस्यों के सहारे यह संख्या 107 पहुंच जाती है। 

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ऐसे में अगर भाजपा टीआरएस (6), बीजेडी (5) और वाईएसआर कांग्रेस (2) को साधने में कामयाब रही तो यह संख्या 120 पहुंच जाएगी। इस समय उच्च सदन में 9 सीटें खाली हैं। ऐसे में बिल पारित कराने के लिए भाजपा को 119 सदस्यों का समर्थन ही चाहिए। इस सत्र के जारी रहते ही छह सीटों पर चुनाव होंगे, जिसमें तीन पर भाजपा का जीतना तय है।
 

कैसे पारित हो सकता है बिल


बिल पारित कराने के लिए सदन में मौजूद सदस्यों में से 50 फीसदी से एक ज्यादा का समर्थन चाहिए। ऐसे में पार्टी अगर टीआरएस, बीजेडी और वाईएसआर कांग्रेस को साध पाई तो उसका अपने एजेंडे से जुड़े बिलों को कानूनी जामा सपना पूरा हो जाएगा।

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मसलन नागरिकता संशोधन बिल पर टीआरएस, बीजेडी, वाईएसआर कांग्रेस जैसे दलों को बड़ी आपत्ति नहीं है। इसी प्रकार तीन तलाक बिल पर एनपीएफ, बीपीएफ जैसे पूर्वोत्तर केदलों को दिलचस्पी नहीं है। ऐसे में पार्टी इस बिल पर जदयू को अनुपस्थित रहने के लिए मना कर और बीजेडी, टीआरएस जैसे दलों की कुछ आपत्तियों का हल निकाल कर अपना काम निकाल सकती है।
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