विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) अध्यक्ष के मामले में संघ को मात खानी पड़ी है। संघ के पसंदीदा व्यक्ति को विहिप अध्यक्ष पद की कमान नहीं मिल सकी है। संघ ने अध्यक्ष पद के लिए हिमाचल प्रदेश के पूर्व राज्यपाल जस्टिस कोगजे के नाम को आगे बढ़ाया था। मगर प्रवीण तोगड़िया के समर्थकों के आगे संघ की पसंद परवान नहीं चढ़ सकी। मजबूरी में संघ आलाकमान को विहिप के अंतराष्ट्रीय अध्यक्ष और कार्यकारी अध्यक्ष पद पर पुरानी जोड़ी को ही बनाए रखना पड़ा है। बताया जा रहा है कि संघ के सरकार्यवाह भैय्या जी जोशी के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ। वरना चुनाव तक कि नौबत आन पड़ी थी।
तोगड़िया को पदमुक्त करने की थी कवायद!
संघ सूत्रों की मानें तो ओडिशा के भुवनेश्वर में हुई विहिप की तीन दिवसीय केंद्रीय प्रन्यासी मंडल एवं प्रबंध समिति अधिवेशन की बैठक में विहिप से प्रवीण तोगड़िया को पदमुक्त करने की कवायद थी। मगर समर्थकों के हंगामे और उनके दबाव की वजह से तोगड़िया विहिप के अध्यक्ष पद पर बरकरार रहने में कामयाब रहे हैं। विहिप अध्यक्ष पद पर कोगजे को बैठाने के साथ ही संघ का प्रयास तोगड़िया को विहिप अध्यक्ष पद से हटाने का था। बताया जाता है कि तोगड़िया के रिश्ते पीएम मोदी से बेहतर नहीं हैं। दोनों के तल्ख रिश्तों की चर्चा पहले भी रही है।
कई मौकों पर तोगड़िया सार्वजनिक रूप से मोदी के कामकाज का विरोध कर चुके हैं। मोदी और तोगड़िया के तल्ख रिश्ते पहले से जगजाहिर हैं। शायद यही वजह है कि संघ तोगड़िया को विहिप से पदमुक्त कर 2019 के लिए मोदी की राह पूरी तरह से आसान बनाने में जुटा था। मगर संघ की कोशिश नाकाम रही है। विहिप के अंतराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष पद पर राघव रेड्डी तो कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में प्रवीण तोगड़िया बरकरार रहे हैं। संघ की पसंद के कोगजे अध्यक्ष नहीं बन पाए।
वोटिंग की बन आई थी नौबत, भैय्या जोशी ने किया बीच बचाव
सूत्र बताते हैं कि भुवनेश्वर में सम्पन्न हुई विहिप-केन्द्रीय प्रन्यासी मण्डल एवं प्रबंध समिति संयुक्त अधिवेशन के अंतिम दिन शुक्रवार 29 दिसम्बर को हंगामे के बीच अध्यक्ष पद के लिए वोटिंग तक कि नौबत आ गई थी। संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार संघ की तरह विहिप में भी हर तीन साल बाद अध्यक्ष पद का चुनाव होता है। उस कवायद के तहत ही इस दफे अधिवेशन में विहिप अध्यक्ष का चुनाव होना था। जब तक अशोक सिंघल विहिप के कर्ता-धर्ता रहे तब तक उन्हीं की राय मान्य होती थी। मगर उनके बाद विहिप की व्यवस्था भी संघ के अधीन हो गई।
विहिप अध्यक्ष के चयन में संघ का सम्मान रखते हुए उसके जरिये सुझाए नाम को ही मानने की परंपरा रही है। मगर इस बार ऐसा नहीं हो सका है। संघ ने इंदौर के रहने वाले कोगजे के नाम को अध्यक्ष पद पर अपनी पसंद के रूप में भेजा था। लेकिन बैठक में विहिप सदस्यों को यह नाम रास नहीं आया और उन्होंने इसका विरोध किया जिसके बाद चुनाव तक कि नौबत आ गई।
अध्यक्ष पद चुनाव में कटा बवाल
डॉ प्रवीण तोगड़िया (फाइल फोटो)
- फोटो : amar ujala
आनन-फानन में एक व्यक्ति को चुनाव अधिकारी बनाया गया। चुनाव अधिकारी ने वोटिंग के लिए नियमों का ऐलान करते हुए अजीब सी शर्त रखते हुए कहा कि वोटिंग के साथ व्यक्ति को पर्चे पर अपना नाम भी अंकित करना पड़ेगा। इसपर कुछ सदस्यों ने हंगामा काटा। बाद में उक्त शर्त को हटा कर वोटिंग की शुरुआत हो गई। बताया जा रहा है कि प्रवीण तोगड़िया के पक्ष में अधिकांश लोग नजर आए। विदेशों से आए प्रतिनिधि भी तोगड़िया के नाम का समर्थन करते दिखे। वोटिंग का परिणाम आता इससे पहले वहां बैठक में संघ के सर कर्यवाह भैय्या जी जोशी पहुंच गए। उन्होंने मौके को देख मामला सम्भालने का प्रयास किया। मगर उनकी मौजूदगी के बीच भी शोर जारी रहा।
इस बीच भैया जी जोशी ने शीर्ष लोगों के साथ अलग से बैठक कर मामला संभालने की कोशिश की। चुनाव अधिकारी के जरिए मतों की गिनती के काम को टाला गया। चुनाव अधिकारी ने गड़बड़ी का आरोप मढ़ते हुए चुनाव को रद्द किया। इसके बाद पुरानी टीम के साथ ही भैया जी जोशी ने अधिवेशन को सम्बोधित किया। पहले व्यवस्था थी कि सरकार्यवाह नए अध्यक्ष के साथ अधिवेशन को संबोधित करेंगे। मगर उन्होंने रेड्डी और तोगड़िया के साथ वार्षिक सभा को सम्बोधित किया। बताया जा रहा है कि विवाद टालते हुए भैय्या जी जोशी ने राघव और तोगड़िया को ही अध्यक्ष और कार्यकारी अध्यक्ष के पद पर बरकरार रखने में भूमिका निभाई। अब दोनों ही अगले तीन वर्ष तक इस पद पर रहेंगे। इस तरह तोगड़िया को विहिप से हटाने का प्रयास विफल रहा है। चाहे वह प्रयास किसी सियासी दबाव के वजह से ही क्यों न रहा हो। मगर भुवनेश्वर की बैठक से तोगड़िया मजबूत होकर निकले हैं। उनका जलवा बरकरार रहा है।
तीन तलाक की तरह राम मंदिर और यूसीसी पर कानून बनाने की उठी मांग
विहिप की बैठक में अधिकांश सदस्यों की राय थी कि जब केंद्र सरकार तीन तलाक पर संसद में कानून बनवा सकती है तो राम मंदिर और यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) पर संसद में कानून क्यों नहीं। वक्ताओं ने अपने सम्बोधन में सरकार के सामने यह बात रखने की मांग की। विहिप का कहना है कि तीन तलाक की तरह राम मंदिर और यूसीसी के मामले में भी सरकार को संसद से कानून बनवाकर मामले का जल्द हल निकालना चाहिए। आने वाले दिनों में विहिप की ओर से यह मांग सार्वजनिक रूप से जोर पकड़ेगी। विहिप ने वर्ष 2018 में अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का कार्य शुरू कराने का ऐलान किया है।