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ऑपरेशन सिंदूर पर पोस्ट: 'प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन..', हाईकोर्ट ने पुणे की छात्रा का निष्कासन आदेश किया खारिज

Mon, 09 Jun 2025 10:06 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई।

सार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने पुणे की छात्रा का निष्कासन आदेश रद्द किया और कॉलेज की कार्रवाई को नैसर्गिक न्याय के खिलाफ बताया। अदालत ने छात्रा को परीक्षा में बैठने की अनुमति देते हुए कॉलेज से उसकी बात सुनकर उचित निर्णय लेने को कहा।
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बॉम्बे हाईकोर्ट - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
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बॉम्बे हाईकोर्ट ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर भारत सरकार की आलोचना करने वाली सोशल मीडिया पोस्ट के लिए गिरफ्तार की गई पुणे की छात्रा को जारी निष्कासन आदेश सोमवार को रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि उसका पक्ष सुने बिना कॉलेज की कार्रवाई ‘नैसर्गिक न्याय का उल्लंघन’ है। मूल रूप से जम्मू-कश्मीर की रहने वाली सिंहगढ़ एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग की 19 वर्षीय छात्रा को पिछले महीने गिरफ्तार किया गया था और उसे बाद में जमानत पर रिहा कर दिया गया।

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जस्टिस मकरंद एस कार्णिक और जस्टिस नितिन आर बोरकर की खंडपीठ ने 27 मई को उसकी तत्काल रिहाई का आदेश देते हुए, अदालत ने कॉलेज से जारी निष्कासन आदेश को भी निलंबित कर दिया, इससे उसे दूसरे वर्ष की सेमेस्टर परीक्षाओं में बैठने की अनुमति मिल गई। 

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पीठ ने सोमवार को कहा कि छात्रा की सुनवाई किए बिना सिंहगढ़ इंजीनियरिंग अकादमी की ओर से जारी निष्कासन पत्र प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन है। निष्कासन आदेश को रद्द करते हुए, अदालत ने संस्थान को उसकी बात सुनने और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करने के बाद उचित निर्णय लेने की स्वतंत्रता प्रदान की। हिरासत के दौरान छूटी परीक्षाओं में छात्र को बैठने की अनुमति देने पर अदालत ने कहा कि उसने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है। 

पीठ ने कहा कि सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय (एसपीपीयू) के परीक्षा बोर्ड (बीओई) के निदेशक को उनके अभ्यावेदन पर शीघ्रता से उचित निर्णय लेना है।

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