दहशतगर्दों के साथ मिलकर हमलों की साजिश रचते थे आतंकी आका
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि जैश के इस ठिकाने से उच्च आवृत्ति वाली संचार व्यवस्था संचालित की जा रही थी, जिसका इस्तेमाल आतंकी आका जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ करने वाले दहशतगर्दों के साथ मिलकर हमलों की साजिश रचने और उनकी गतिविधियों की जानकारी रखने के लिए करते थे। सुरक्षा एजेंसियों ने पंजाब प्रांत के शकरगढ़ में स्थित सरजल शिविर को इसके संचार ढांचे के कारण ही अपने प्रमुख निशाने के तौर पर चिन्हित किया था। बिना किसी बाधा के संचार संपर्क स्थापित करने के लिए यहां लंबे एंटीना का इस्तेमाल किया जाता था। सूत्रों ने कहा कि यह संचार ढांचा ध्वस्त होने से जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ करने वाले आतंकवादियों के लिए सीमा पार बैठे अपने आकाओं के साथ संपर्क करना आसान नहीं होगा।
पाक सेना और आईएसआई से मिलते थे संचार उपकरण
सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसी आईएसआई की तरफ से आतंकियों को लोरा (लॉन्ग रेंज) अल्ट्रा सेट और डिजिटल मोबाइल रेडियो (डीएमआर) सहित सैन्य स्तर के संचार उपकरण मुहैया कराए जाते रहे हैं। यही वजह है कि इनके जरिये होने वाला संचार संपर्क पारंपरिक दूरसंचार नेटवर्क की पकड़ से बाहर रहता था। यही नहीं, दहशतगर्दों की मदद के इरादे से ही पाकिस्तानी सेना ने अंतरराष्ट्रीय सीमा और एलओसी के आसपास अपनी दूरसंचार कंपनियों के सिग्नल मजबूत कर रखे हैं।
पाक सेना और आईएसआई से मिलते थे संचार उपकरण
सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसी आईएसआई की तरफ से आतंकियों को लोरा (लॉन्ग रेंज) अल्ट्रा सेट और डिजिटल मोबाइल रेडियो (डीएमआर) सहित सैन्य स्तर के संचार उपकरण मुहैया कराए जाते रहे हैं। यही वजह है कि इनके जरिये होने वाला संचार संपर्क पारंपरिक दूरसंचार नेटवर्क की पकड़ से बाहर रहता था। यही नहीं, दहशतगर्दों की मदद के इरादे से ही पाकिस्तानी सेना ने अंतरराष्ट्रीय सीमा और एलओसी के आसपास अपनी दूरसंचार कंपनियों के सिग्नल मजबूत कर रखे हैं।